बताया गया है कि रामजन्मभूमि में दो स्थानों पर 60 मीटर गहराई व पांच जगहों पर 40 मीटर गहराई तक की मिट्टी का सैंपल लिया गया है। मृदा परीक्षण व भूकंपरोधी क्षमता की जांच करके अब आईआईटी चेन्नई अंतिम रिपोर्ट देगा। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट आने के बाद मंदिर की नींव खोदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
मंदिर की तकनीक बेहद एडवांस होगी। गहराई में मिट्टी की जांच और भूकंप रोधी क्षमता पर पूरी रिसर्च की जा रही है। राममंदिर निर्माण की इंजीनियरिंग का काम लार्सन एंड टूब्रो को सौंपा गया है।
लार्सन एंड टूब्रो ने योग्यतम लोगों को अपने साथ जोड़ा है। रामजन्मभूमि में दो स्थानों पर 60 मीटर गहराई और पांच जगह 40 मीटर गहराई तक की मिट्टी का सैंपल लेकर जांच के लिए आईआईटी रुड़की को भेजा गया है।
इसी तरह भूकंप से रक्षा संबंधी जांच भी कराई जा रही है। मंदिर में लोहा नहीं लगेगा। कार्य स्थल पर व्यू कटर नहीं लगाया जाएगा। सब लोग मंदिर का काम देख सकेंगे।