भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत।
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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कहते हैं, आमदनी घट रही, खर्चे बढ़ रहे, किसान खेती छोड़ रहा, ये हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने किसानों के मुद्दे पर खुलकर बात की:
सवाल: किसानों की मुख्य समस्या क्या मानते हैं?
जवाब: किसान तमाम चुनौतियों का सामना कर रहा है। आमदनी घट रही है। खेती-किसानी के खर्चे बढ़ रहे हैं। परेशान किसान खेती छोड़ रहे हैं। यह चिंताजनक है। फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित होनी चाहिए। 1967 को आधार वर्ष मानें तो कर्मचारी एक महीने के वेतन से एक क्विंटल गेहूं नहीं खरीद सकता था। एक तोला सोना की कीमत में तीन क्विंटल गेहूं की खरीद नहीं हो पाती थी। एक क्विंटल गेहूं में 2500 ईंट आ जाया करती थी। आज किसान की स्थिति सबके सामने है। सरकारों को किसानों को सपोर्ट करना चाहिए।
सवाल: किसानों की स्थिति में सुधार के लिए क्या किया जाना चाहिए?
जवाब: स्थिति में सुधार लाने के लिए समय-समय पर तमाम सुझाव आए। स्वामीनाथन कमेटी ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं। सरकार को फसल की कुल लागत (कास्ट) को लेकर तय सी2 के फॉर्मूले पर एमएसपी देना चाहिए। तभी किसानों की स्थिति में सुधार संभव है। किसान परिवारों के समर्थन के लिए कई अन्य तरह के प्रोत्साहन की भी जरूरत है।
सवाल: किस तरह के प्रोत्साहन की जरूरत है?
जवाब: किसानों को बिजली फ्री दी जाए ताकि उसे फसलों की सिंचाई करने में चिंता न रहे। किसानों के बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थानीय स्तर पर क्वालिटी एजुकेशन हब बनाया जाए, जहां मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था हो। एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री बढ़ाई जाएं, जिससे कृषि सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ें। निजीकरण रुकना चाहिए। बड़े उद्योगों की जगह छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर पैदा हों और पलायन रुके। गन्ने का भुगतान 14 दिन में सुनिश्चित किया जाए।
सवाल: किसान आंदोलन से संबंधित समझौते के बाद क्या प्रगति है?
जवाब: सरकार के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त हुआ है। कमेटी गठन के लिए सरकार को किसानों की ओर से नाम दिया जाना है। ये नाम जल्दी ही दे दिए जाएंगे। सरकार की कार्यवाही पर हमारी नजर बनी रहेगी।