वर्ष 2014 के चुनाव में इन दस सीटों पर सपा के छह सदस्य जीते थे। इनमें जावेद अली खां, प्रो. रामगोपाल यादव, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव व रविप्रकाश वर्मा के अलावा मो. आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा और पूर्व पीएम चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर शामिल थे।
पर, 2019 में लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद आजम के त्यागपत्र से रिक्त विधानसभा की रामपुर सीट के उपचुनाव में तजीन ने सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह को राज्यसभा भेजा था।
बदले राजनीतिक समीकरण में नीरज शेखर ने सपा छोड़ने के साथ राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। अब वे भाजपा से राज्यसभा सदस्य हैं। इस प्रकार सपा के चार ही सदस्य बचे। हरदीप पुरी को भाजपा ने मनोहर परिकर के स्थान पर यूपी से राज्यसभा में भेजा था।
विधानसभा की 403 सीटों में इस समय 8 स्थान रिक्त हैं। शेष 395 में सहयोगी दलों सहित भाजपा के पास 314 से अधिक विधायक हैं। इनमें 305 विधायक भाजपा के ही हैं। राज्यसभा के एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम औसतन 39 से अधिक विधायकों का समर्थन चाहिए होता है।
सपा के पास 48, बसपा के पास 18 और कांग्रेस के पास सिर्फ 7 विधायकों का समर्थन है। लेकिन सपा, कांग्रेस और बसपा के भी कुछ विधायक भाजपा के साथ ही हैं। इसलिए सपा अपने बल पर सिर्फ एक ही व्यक्ति को राज्यसभा भेज सकती है।
वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए बसपा, कांग्रेस और सपा के बीच फिलहाल ऐसे कोई समीकरण नहीं हैं जिनके आधार पर इनकी तरफ से किसी गठजोड़ की संभावना हो। ऐसी स्थिति में अभी तक निर्विरोध चुनाव की ही पूरी स्थिति दिख रही है। इसमें भाजपा अपने संख्या बल के आधार पर नौ और सपा अपने एक व्यक्ति को राज्यसभा भेजने में सफल रहेगी।
राज्यसभा में यूपी से 31 सीटों का कोटा है। दस सीटों के घोषित चुनाव में भाजपा को अगर 9 सीटों पर जीत हासिल होती है तो वहां भाजपा का आंकड़ा 23 हो जाएगा।
- यूपी से भाजपा के 23 सदस्यों का आंकड़ा केंद्र की मोदी सरकार को राज्यसभा में सियासी ताकत तो देगा ही, वहीं यूपी जैसे बड़े राज्य में बड़ी सियासी ताकत के प्रतीक सपा-बसपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका को और सीमित करेगा। इसके बाद राज्यसभा में सपा के सदस्यों की संख्या घटकर सिर्फ 5 रहने और बसपा के भी सिर्फ दो सदस्य बचेंगे। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या यूपी से कपिल सिब्बल के रूप में सिर्फ एक रह जाएगी।
बदलेगी उच्च सदन की तस्वीर
10 सीटों पर परिणाम के बाद उच्च सदन की तस्वीर में बड़ा बदलाव होगा। भाजपा की अगुआई वाले राजग के सदस्यों की संख्या 118 पहुंच जाएगी। अभी 245 सदस्यीय उच्च सदन में बहुमत का आंकड़ा 123 है।
- गौरतलब है कि नतीजे आने के बाद उच्च सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या 93 हो जाएगी। इसके अलावा जदयू के पांच, अन्नाद्रमुक के 9, बीपीएफ, आरपीआई, एनपीएफ, एमपीएफ के एक-एक और सात नामित और निर्दलीय सदस्य राजग में हैं।
बहुमत के निकट पहुंचने से उच्च सदन में सरकार की उलक्षनें अब खत्म होंगी। हालांकि बीते डेढ़ साल में राज्यसभा में बहुमत के अभाव में भी भाजपा ने अपने मूल एजेंडे को परवान चढ़ाने में सफलता हासिल की।
अनुच्छेद 370, तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाला कानून, नागरिकता संशोधन बिल को पारित कराने में सफलता हासिल की। उस दौरान भाजपा को राजग के इतर शिवसेना, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजेडी का परोक्ष और प्रत्यक्ष लाभ मिला। भविष्य में ऐसी स्थिति आने पर भाजपा को इनमें से महज एक दल को ही साधना होगा।
राजबब्बर, पूनिया का पत्ता कटना तय
चुनाव में कांग्रेस को दोनों सीटें गंवानी होंगी। उत्तराखंड से पार्टी सांसद राजबब्बर और उत्तर प्रदेश के पार्टी सांसद पीएल पूनिया की हार निश्चित है। इसके अलावा सपा को पांच सीटें गंवाने की सूरत में महज एक सीट हासिल होगी। ऐसे में सपा से महज रामगोपाल यादव की वापसी ही तय मानी जा रही है।
इसके अतिरिक्त सपा के दूसरे चार सांसद रविप्रकाश वर्मा, विशम्भर निषाद, चंद्रपाल सिंह यादव और जावेद अली खान की हार निश्चित है। बसपा को भी राजाराम और वीर सिंह की सीटें गंवानी होगी।