नरेंद्र मोदी की फौज में यूपी से कई बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक राजनाथ सिंह को गृह मंत्रालय मिलना तय माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक राजनाथ के अलावा मोदी की कैबिनेट में कलराज मिश्र, संतोष गंगवार, मेनका गांधी और उमा भारती को भी शामिल किया जा सकता है।
अमेठी लोकसभा सीट से हारने के बाद भी स्मृति ईरानी को मोदी की टीम में अहम जगह मिल सकती है।
वहीं, कानपुर से भाजपा के सांसद और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कोई जगह नहीं दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
यूपी है मुख्य एजेंडे में
मोदी उत्तर प्रदेश को प्रमुख एजेंडे में शुरू से ही रखने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि इसकी वजह भी है। इसके लिए थोड़ा अतीत की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है।
पिछले एक दशक से संघ के लिए यूपी बड़ी चुनौती रहा है। प्रदेश में संघ परिवार की घटती ताकत सरसंघचालक मोहन भागवत की गहरी चिंता का विषय रहा है।
इसे संघचालक और संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर व्यक्त भी करते रहे हैं।
चुनाव प्रचार अभियान के दौरान खुद नरेंद्र मोदी भी कई बार यूपी की भागीदारी के बगैर कांग्रेसमुक्त भारत का सपना पूरा न हो पाने की बात कहकर इसी तरह का संदेश देते रहे हैं।
मंत्री के लिए तय किए मानक
जानकारी के मुताबिक, मंत्रिपरिषद में शामिल करने के लिए जो मानक तय किए गए थे, उनमें दावेदार का कार्यकर्ताओं के दिल व दिमाग में सम्मान और भरोसा होना पहली शर्त थी।
जनता के बीच पाक साफ छवि और लोकप्रिय होना भी शर्त रखी गई थी। इसी के साथ उन चेहरों से सामाजिक समीकरणों के संतुलन का उद्देश्य भी पूरा होता हो।
अतीत में जिन पर किसी तरह का दाग न हो और कार्यकर्ताओं व जनता के साथ उनका सहज संवाद हो।
सूचना के मुताबिक इस बार मंत्रालयों की संख्या घटाकर 43 से 34 कर दी गई है। यूपीए सरकार में 43 मंत्रालय थे।