बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि राजनाथ सिंह ने उनके पर कतर दिए। अब वे चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। तकनीकी रूप से उन्हें राज्यपाल बनाने का श्रेय राजनाथ को जाता है, पर इसमें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का आशीर्वाद मुख्य रूप से शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘गृहमंत्री घबरा तो नहीं रहे हैं कि कहीं मैं फिर चुनाव लड़ने न आ जाऊं। आज समारोह में लखनऊ के हर वर्ग और तबके लोग शामिल हैं। अटल जी से मिली इतनी बड़ी विरासत राजनाथ सिंह को सौंपकर जा रहा हूं।’ टंडन ने लखनवी तहजीब का जिक्र करते हुए कहा कि वे गालिब की तरह ही आधे हिंदू और आधे मुसलमान हैं। शहर काजी से उनका पीढ़ियों का संबंध है। लखनऊ से उनका रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।
अपनी किताब का हवाला देते हुए टंडन ने लोगों से पूछा कि लखनऊ में लक्ष्मण टीला नाम की कोई चीज थी या नहीं। अगर है तो उसे ढूंढने की जिम्मेदारी आप लोगों को सौंपता हूं। समारोह में मौजूद मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली से मुखातिब होते हुए कहा कि इस मामले में सरकारी रिकॉर्ड भी देख लिए जाएं, उसके आधार पर फैसला हो। टंडन ने सीएम योगी के कार्यों की भी प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अभिनंदन समारोह के स्वागत अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी ने लखनऊ के गली-मोहल्ले की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर डाल दी। यह जिम्मेदारी तो यहां के मेयर की है। उन्होंने लालजी टंडन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे लखनऊ के चलते-फिरते इनसाइक्लोपीडिया हैं। वे बिहार में लखनऊ का गौरव बढ़ाएंगे। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि राज्यपाल बनाने की असली चाबी गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास ही है। टंडन बिहार में ऐसा काम करके दिखाएंगे कि लोग उन्हें याद रखेंगे। उन्होंने टंडन को पुस्तक ‘गाइड फॉर गवर्नर्स’ भी भेंट की।
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि लालजी टंडन लखनऊ की विरासत हैं। प्रतिद्वंद्वी भी उनके पैर छूने से खुद को नहीं रोक पाते। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि कार्यकर्ता का अवसाद चुटकियों में दूर कर देने की कला टंडन को आती है। पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने लखनऊ से लंदन, नजफ और मदीना के लिए सीधी उड़ान सेवा और पुराने लखनऊ की दशा सुधारने की मांग प्रदेश सरकार से की। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने टंडन के स्वागत में अभिनंदन पत्र पढ़ा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम बिना लिए कहा कि छह-छह महीने की सरकार बनाने का फैसला कांशीराम, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने लिया था। वे कार्यक्रम के स्वागत अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी के उस बयान का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि लालजी टंडन के यहां एक गीत सदैव बजता था, ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना।’