मंत्री बनने की आस लगाए बैठे भाजपा के दिग्गज विधायकों को मौका नहीं मिला। जबकि मंत्रिमंडल में बड़ी संख्या में पहली बार चुनाव जीते विधायकों को शामिल किया गया है।
इनमें पांचवीं बार विधायक चुने गए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हृदय नारायण दीक्षित का नाम प्रमुख है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पार्टी में उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र और प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।
पंकज को मंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। पार्टी के कुछ नेताओं ने पैरवी भी की थी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने परिवारवाद की राजनीति का आरोप लगने की बात कहकर पंकज को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया।
वहीं, सूत्रों का कहना है कि गृहमंत्री भी परिवारवाद के आरोप से बचने के लिए पंकज की पैरवी नहीं कर रहे थे। इसी तरह गोरखपुर से दूसरी बार विधायक बने डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को भी मंत्री नहीं बनाया गया है।
गरिमा सिंह को भी नहीं मिली मंत्रिमंडल में जगह
गरिमा सिंह
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अग्रवाल को मुख्यमंत्री का राजनीतिक विरोधी माना जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीराम चौहान को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इसके अलावा वीरेंद्र सिंह सिरोही, पूर्व मंत्री दीनानाथ भाष्कर, बैजनाथ रावत, बहोरनलाल मौर्य और फागू सिंह चौहान को भी मंत्रिमंडल में नहीं शामिल किया गया है।
वाराणसी से दूसरी बार विधायक चुने गए रवींद्र जायसवाल का भी मंत्री बनना तय था। लेकिन वाराणसी दक्षिणी सीट से नीलकंठ तिवारी की जीत के बाद भाजपा ने काशी में पार्टी का विरोध करने वाले लोगों को संदेश देने के लिए तिवारी को राज्य मंत्री बनाया।
तिवारी के मंत्री बनने से जायसवाल को शामिल नहीं किया जा सका। इसके अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली से जीते दलबहादुर कोरी, अमृतपुर से विधायक सुशील शाक्य, जालौन के विधायक भगवती प्रसाद सागर, कुलदीप सिंह सेंगर, अवतार सिंह भड़ाना और सुनील दत्त द्विवेदी को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। अमेठी से कांग्रेस का गढ़ ढहाकर विधायक बनी गरिमा सिंह को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।