वह सचिवालय में हों, मुख्यमंत्री निवास या किसा अन्य जगह, कितना भी जरूरी काम हो, शाम को साढ़े चार बजे बजते ही सपा दफ्तर जरूर पहुंच जाते थे।
उस रोज जारी होने वाली रिलीज का एक-एक शब्द देखते थे। करेक्शन लगाकर रूपलाल को दुरुस्त कराने के लिए भेजते थे। विज्ञप्ति पार्टी लाइन के मुताबिक है, यह तसल्ली होने पर हस्ताक्षर करते थे।
दशकों तक समाजवादी पार्टी के एकमात्र प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व निभाने वाले राजेन्द्र चौधरी का यह रूटीन अब देखने को नहीं मिलेगा। प्रवक्ता पद से उनकी इस तरह की विदाई की उम्मीद नहीं थी।
राजेन्द्र चौधरी करीब 40 साल से मुलायम सिंह से सक्रिय तौर पर जुड़े हुए हैं। चौधरी चरण का दौरा थ। अधिकतर समाजवादी उनके लोकदल का हिस्सा थे। मुलायम सिंह उनमें मुख्य थे। राजेन्द्र चौधरी को चरण सिंह ने 1974 में गाजियाबाद शहर से प्रत्याशी बनाया लेकिन वह चुनाव हार गए।
1977 में वह उसी सीट से विधायक बनकर लखनऊ पहुंचे। तब मुलायम सिंह पहली बार सहकारिता मंत्री बने थे। कुछ दिनों की नाराजगी को छोड़कर यह साथ अटूट बना रहा। मुलायम सिंह लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष थे और राजेन्द्र चौधरी महामंत्री।
बैचलर होने के नाते वह पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के तौर पर राजधानी में ही पुराने दफ्तर में रहते थे। वहीं टेबिल पर सोना, लिखने-पढऩे का काम करना उनकी आम दिनचर्या थी।
नहीं छोड़ा मुलायम का साथ
राजेंद्र चौधरी
- फोटो : amar ujala
जिस समय लोकदल का बंटवारा हुआ, अधिकतर जाट नेता अजित सिंह के साथ चले गए, लेकिन राजेन्द्र चौधरी ने मुलायम सिंह को नहीं छोड़ा। वह उन्हें ही चरण सिंह का उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। पिछले 35-36 सालों से वह लखनऊ में ही ज्यादा रहे।
मीडिया और राजनीतिक हल्कों के लोग कहते हैं कि उनके स्वभाव में ज्यादा बदलाव नहीं आया। मजाल कि कोई उनसे पार्टी के अंदर का बात निकलवा ले। सीधी, सपाट बात, पुराने संस्मरण सुनाना, बातचीत में जब भी मौका मिले, सामाजिक बुराइयों, खासतौर से रूढिवादी परंपराओं पर चोट करना उनके स्वभाव का हिस्सा है।
शुद्ध शाकाहारी, थोड़ी मात्रा में बिना प्याज के भोजन की उनकी आदत विपरीत परिस्थितियों में भी रही और काबीना मंत्री होने के बाद भी जारी है। उन पर सिफारिशों से बचने के आरोप तो लग सकते हैं लेकिन उनके विरोधी भी यदि सपा में किसी को ईमानदारी में सौ फीसदी नंबर देते है,
वह लंबे समय से सपा के प्रदेश प्रवक्ता थे।
हटवाई नेम प्लेट, समेटा सामान
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी नजदीकियों पर सपा मुखिया कई बार टिप्पणी कर चुके थे। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में शिवपाल ने उन पर टिप्पड़ी की थी कि सीएम के आसपास कुछ ऐसे मंत्री भी रहते हैं जिनके पास कुछ काम नहीं है। शायद यही वजह है कि अखिलेश यादव से अध्यक्ष पद हटते ही उन्हें प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।
सपा दफ्तर में लंबे वक्त से राजेन्द्र चौधरी का सुसज्जित कक्ष था। इसमें अखबारों की फाइल और कुछ किताबें रखीं थी। बाहर नेम प्लेट लगी थी। प्रवक्ता की जिम्मेदारी से अलग होते ही उन्होंने नेम प्लेट हटवा दी।
जो थोड़ा बहुत सामान था, उसे समेटकर ले गए। अब वह सवेरे 10 बजे और शाम को साढ़े चार बजे सपा दफ्तर में नहीं मिलेंगे। मीडिया के लोग उनसे हंसी-मजाक तो करेंगे लेकिन पार्टी दफ्तर के बाहर। पुराने नेताओं के मुताबिक प्रवक्ता पद से ऐसी विदाई की किसी को उम्मीद नहीं थी।