केंद्र में लखनऊ मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को जल्द पास कराने के लिए मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने मंगलवार को दिल्ली में डेरा डाल दिया।
नवंबर-दिसंबर तक मेट्रो से जुड़े निर्माण राजधानी में शुरू किया जाना है, इसके लिए डीपीआर को केंद्र से इसी माह मंजूरी मिलना जरूरी है। डीपीआर को योजना आयोग और वित्त मंत्रालय से अहम मंजूरी मिलनी है।
मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर 27 अगस्त को एक कदम आगे बढ़ी थी। कैबिनेट से अप्रूव की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में फाइनेंशियल रेट ऑफ रिटर्न को चार फीसदी से बढ़ा कर 8.29 फीसदी कर दिया गया था।
इसके बाद में केंद्र में पहली कॉपी रिसीव कराई गई थी। नार्थ साउथ कॉरिडोर के तौर पर 23 किलोमीटर लंबे रूट की इस परियोजना में लगभग साढ़े छह हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का खर्च आएगा।
नगर विकास मंत्रालय ने लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के एक बिंदु पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें बदलाव कर दिया गया है।
केंद्र की मुख्य आपत्ति कुल खर्च के सापेक्ष राजस्व अर्जित करने के संबंध में थी। डीपीआर में इसको चार प्रतिशत दर्ज किया गया था, मगर अब इसको बढ़ा कर कर 8.29 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे अधिक राजस्व प्राप्त होगा। इसी राजस्व से जो भी ऋण परियोजना पर खर्च करने के लिए लिया जाएगा, उसका भुगतान आसानी से हो सकेगा। मेट्रो रेल परियोजना को मिलने वाली आर्थिक मदद ही सबसे बड़ा मुद्दा है।
जिसके लिए यह डीपीआर अप्रूव कराई जाती है। प्रदेश सरकार के लिए साढ़े छह हजार करोड़ रुपए की भारी भरकम धनराशि अकेले खर्च कर पाना संभव नहीं है।
इसलिए केंद्र की मदद और एजेंसियों के जरिये ऋण एक बड़ा मुद्दा है। मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि वे दिल्ली में डीपीआर को जल्द पास कराने की कोशिश करेंगे।