फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP News: सौर ऊर्जा से खपत की 35 फीसदी बिजली पैदा कर रहा रेलवे, विभाग दर विभाग बदलती है कहानी

Sun, 07 Jun 2026 12:52 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

रेलवे सौर ऊर्जा से खपत की 35 फीसदी बिजली पैदा कर रहा है। विभाग दर विभाग  सौर ऊर्जा की कहानी बदलती है। कहीं दूरी तो कहीं लगने के बावजूद  इस्तेमाल नहीं हो रहा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
सौर ऊर्जा केंद्र (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी लखनऊ में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने के मामले में सरकारी विभाग एक ढर्रे पर नहीं हैं। रेलवे अपने कुल खपत की 35 फीसदी बिजली सौर ऊर्जा के दम पर पैदा कर रहा है। वहीं, पुलिस और प्रशासन दोनों के भवन सौर ऊर्जा से रोशन नहीं हैं। पुलिस के किसी कार्यालय में सोलर पैनल नहीं लगा है, जबकि कलेक्ट्रेट में वर्ष 2016 में पैनल तो लगे, लेकिन ये पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
विज्ञापन


सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के मामले में लखनऊ प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। इस समय यहां रोजाना औसतन 350 घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, लेकिन कई सरकारी विभागों ने अभी तक इसकी शुरुआत तक नहीं की है। जबकि सामान्य परिवार के मुकाबले सरकारी कार्यालयों का बिजली खर्च कई गुना है। सरकारी विभागों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने पर जनता के धन की बचत होगी, साथ ही शहर में बिजली की मांग भी कम होगी।

रेलवे सालाना बचा रहा चार करोड़

रेलवे ने काफी समय पहले सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। यह पूरे मंडल में हर साल करीब चार करोड़ रुपये की बिजली सौर ऊर्जा से पैदा कर रहा है। उत्तर रेलवे में स्टेशन बिल्डिंग, रेलवे कॉलोनियों, लेवर क्रॉसिंग गेट, रेलवे वर्कशॉप, डिपो, अस्पतालों आदि में 2200 किलोवाट के सोलर पैनल लगे हैं। इनसे हर साल 30 से 35 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इस तरह से इनसे करीब 1.80 करोड़ रुपये बिजली के बिल की बचत होती है। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में 3500 किलोवाट के सोलर पैनल लगे हैं। इनसे सालाना 50 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही है और दो से 2.50 करोड़ रुपये की बचत होती है।

केजीएमयू: 2300 किलोवाट की क्षमता, काम कर रहे महज 1200 किलोवाट

केजीएमयू में वर्ष 2010-12 में राजकीय निर्माण निगम ने कुछ भवनों पर सोलर पैनल लगाए गए थे। जबकि वर्ष 2016 में नेडा के जरिये अन्य विभागों में सोलर पैनल स्थापित किए गए। अधिकांश पैनलों का तो अभी तक बिजली ग्रिड से कनेक्शन भी नहीं जोड़ा गया है। इस समय यहां लगे कुल 2300 किलोवाट के मुकाबले सिर्फ 1200 किलोवाट क्षमता के पैनल ही काम कर रहे हैं। कुलपति ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की थी। बिजली विभाग के इंजीनियरों ने अपनी रिपोर्ट में कुल बिजली खपत का महज सात फीसदी उत्पादन होने की रिपोर्ट भेजी है।

लविवि में हर महीने 13 लाख की बचत

लविवि प्रशासन के मुताबिक, इस समय परिसर में 2500 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगे हैं। इनसे करीब 13 लाख रुपये की बचत हर महीने होती है।

कलेक्ट्रेट में काम नहीं कर रहे सोलर पैनल

कलेक्ट्रेट में वर्ष 2016 में 108 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगे थे। नेडा की टीम ने सर्वे कर बताया कि सोलर प्लांट निष्क्रिय है। यहां हर महीने करीब छह लाख रुपये का बिजली बिल आता है। इस समय 235 किलोवाट की जरूरत है। पैनल दोबारा लगवाने की प्रक्रिया चल रही है। कार्यालय के साथ ही डीएम आवास का भी सर्वे हो गया है। 35 किलोवाट का पैनल लगना प्रस्तावित है।
विज्ञापन

पुलिस के पास नहीं सौर ऊर्जा की शक्ति

लखनऊ पुलिस के पास कई ऐसे भवन और थाने हैं, जहां सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा की जा सकती है। इन भवनों पर अगर सोलर पैनल लग जाए तो न सिर्फ बिजली का बिल बचेगा, बल्कि अतिरिक्त उत्पादन कर बिजली स्टोर भी की जा सकती है। अगर ऐसे भवनों और थानों की बात की जाए तो डालीगंज स्थित जेसीपी एलओ का दफ्तर, पुलिस लाइन, पुलिस आयुक्त आवास, हजरतगंज, चौक, कैसरबाग, अमीनाबाद, नाका, ठाकुरगंज, विभूतिखंड, गोमतीनगर और कई ग्रामीण इलाकों के थाने हैं, जिनके पास सोलर पैनल लगाने की जगह है। इसके बावजूद अब तक न तो इस पर किसी ने ध्यान दिया और न ही कभी कोई चर्चा हुई।

उपयोग से ज्यादा बिजली पैदा कर रहे आईटीआई अलीगंज और महिला पॉलीटेक्निक

अलीगंज राजकीय आईटीआई में 125 किलोवाट का सोलर प्लांट लगा है। इससे हर महीने 15000 से 18000 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, जिससे हर महीने करीब 2500 यूनिट बिजली की बचत होती है। इसी तरह राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में 100 किलोवाट का प्लांट लगा है। इससे हर महीने 12000 से 14000 यूनिट बिजली बनती है और औसत बचत करीब 1000 यूनिट है।

एलडीए: हर महीने दो लाख रुपये की बचत

एलडीए के गोमतीनगर कार्यालय में 108 किलोवाट क्षमता का प्लांट लगा है, छत पर जगह कम होने और लगाने में समस्या है। एलडीए में अभी 900 किलोवाट का बिजली कनेक्शन है। सोलर प्लांट लगने से बिजली बिल में हर महीने करीब दो लाख रुपये की बचत होती है। इस समय करीब 11 लाख रुपये महीना बिल जाता है, सर्दी में यह सात से आठ लाख रुपये होता है।

सौर उर्जा से रोशन विकास भवन, बिल हुआ आधा

विकास भवन में 100 किलोवाट का रूफटॉप सोलर संयत्र लगा है। इससे बिजली बिल आधा हो गया है। कार्यालयों में प्रकाश के साथ ही पंखा, कूलर और एसी चलता है। डीडीओ अजीत सिंह ने बताया कि करीब चार वर्ष पूर्व सोलर संयंत्र लगा था। पहले जो बिजली बिल ढाई लाख के करीब आता था, अब यह आधा हो गया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें