घर बैठे मोबाइल से ही रेवले टिकट बुक कराने की महत्वकांक्षी योजना यात्रियों को रास नहीं आ रही है।
उत्तर प्रदेश से रोजाना केवल छह से आठ टिकट ही मोबाइल फोन से बन रहे हैं। लखनऊ के आठ यात्रियों ने ही अब तक अपने टिकट एसएमएस भेजकर बुक कराए हैं।
रेलवे ने जिस उत्साह के साथ एक जुलाई को मोबाइल फोन से रेल आरक्षण की योजना लागू की थी, उसके परिणाम देखकर अधिकारियों के बीच मंथन शुरू हो गया है।
इतनी बड़ी योजना की सुस्त चाल को देखकर रेलवे अफसर भी हलकान हैं। बीती शुक्रवार को आईआरसीटीसी अधिकारियों के बीच इस योजना को रफ्तार देने के लिए चर्चा हुई।
अब रेलवे इस योजना को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रहा है।
आईआरसीटीसी ने एक जुलाई 2013 को मोबाइल फोन से एसएमएस भेजकर रेल आरक्षण टिकट बनाने की योजना शुरू की थी।
शुरू के दस दिन में केवल 25 टिकट ही मोबाइल फोन से एसएमएस कर बनाए जा सके। एक से 20 जुलाई तक देश भर के कुल 450 लोगों ने एसएमएस सेवा का लाभ उठाते हुए अपने टिकट बनवाए।
अब तक 29 दिनों में लगभग दो हजार टिकट ही एसएमएस से बन पाए हैं। हालत यह है कि देश के सभी 17 रेलवे जोन को मिलाकर केवल 150 टिकट रोजाना एसएमएस भेजकर बन रहे हैं।
देश में रोजाना दस लाख रेल आरक्षण टिकट बनाए जाते हैं। इनमें से करीब 4:55 लाख ई-टिकट आईआरसीटीसी बनाता है।
दो मार्च को आईआरसीटीसी ने रिकार्ड 5.02 लाख टिकटों की बिक्री कर दी थी। दिसम्बर तक साफ्टवेयर में अपग्रेडेशन के बाद रोजाना छह लाख टिकट बनाने का लक्ष्य आईआरसीटीसी ने निर्धारित किया है।