ट्विटर के जरिये मदद की गुहार लगाने वालों को रेलमंत्री ने दूध, भोजन और डॉक्टर आदि मुहैया कराकर नया रिकॉर्ड बना दिया, पर यही सुविधा अब रेलवे के लिए सिरदर्द बन गई है।
रेलमंत्री सुरेश प्रभु के अलावा रेल मंत्रालय, विभिन्न जोन के महाप्रबंधकों के ट्विटर अकाउंट पर रोजाना हजारों की संख्या में ट्वीट आ रहे हैं। लिहाजा रेलवे इनका जवाब देने या फिर इन पर कार्रवाई करने में बेबस साबित हो रहा है।
रेलवे के अधिकारियों की मानें तो ट्विटर पर ज्यादातर ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जिन्हें हेल्पलाइन के जरिये सुलझाया जा सकता है। बावजूद इसके लोग सीधे रेल मंत्री या मंत्रालय को ट्वीट कर देते हैं।
यही नहीं बड़ी संख्या में शिकायतें फर्जी भी निकलती हैं। पर, ऐसे में यात्रियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना उचित नहीं लगता है। फिलहाल बृहस्पतिवार को इस संबंध में एक एडवाइजरी जारी की गई, जिसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सभी जोनों के डीआरएम को सौंपी गई है।
इसमें कहा गया है कि यात्री पहले अधिकृत हेल्पलाइन के जरिये मदद लेने का प्रयास करें। अगर वहां से मदद न मिले तो ही ट्वीट करें। शिकायत में सूचना स्पष्ट दें ताकि रेलवे ठीक से मदद कर सके। इसके अतिरिक्त ट्वीट में पीएनआर नंबर, कोच, बर्थ नंबर, यात्रा की तारीख और फोन नंबर जरूर लिखें।