एसी बोगियों में यात्रियों को ओढ़ने के लिए कंबल नहीं दिए जाएंगे। इसकी जगह अब कोच का ही तपमान बढ़ाया जाएगा। कैग रिपोर्ट में कंबलों की बदहाली सामने आने के बाद रेल मंत्रालय कुछ ऐसी ही योजना बना रहा है। हालांकि विशेषज्ञ इसे खर्चे में कटौती बता रहे हैं।
ज्ञात रहे, कैग ने पिछले तीन सालों में लिनेन की धुलाई वाले रेलवे के 33 डिपो की पड़ताल की थी। इसमें लखनऊ, सिकंदराबाद, कोलकाता, मुंबई सहित नौ जोन के अहम स्टेशन शामिल थे। नियम ये है कि चादरों, तकियों, तौलियों और कवर्स एक बार इस्तेमाल होते ही तुरंत धोने के लिए दिए जाने चाहिए।
कंबल हर दो महीने में धुलने चाहिए, लेकिन इसका पालन बिल्कुल भी नहीं हो रहा है। ऑडिट में सामने आया था कि कंबलों को छह-छह महीने तक नहीं धुलाया जा रहा है।
चेन्नई में जहां तकियों के कवर इस्तेमाल चादरों को फाड़ कर बनाये जा रहे थे। इसके अलावा उत्तर रेलवे में इस्तेमाल हुए गंदे बदबूदार तकिया व कंबल यात्रियों को दिए गए। इतना ही नहीं पुराने कंबलों को नष्ट तक नहीं किया गया। कैग की रिपोर्ट जारी होने के बाद से रेलवे की इमेज पर दाग लग रहे थे।
रेलवे फजीहत से बचने के लिए अब ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियों को कंबल और चादर बंद करने पर विचार कर रही है। इसकी जगह कोच का तापमान 19 डिग्री से बढ़ाकर 24 डिग्री किया जाएगा।
कहीं खर्चा घटाना तो नहीं है बहाना
डेमो पिक
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे सूत्रों की मानें तो बोगी का तापमान बढ़ाने के पीछे रेलवे की मंशा खर्चा घटाना हो सकती है। हर बेड रोल की धुलाई पर रेलवे को 55 रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि यात्रियों से रेलवे 25 रुपये ही वसूलती है।
इतना ही नहीं अकेले लखनऊ से ट्रेनों में 15 लाख रुपये का लिनेन सालाना चोरी हो जाता है। रेलवे पहले से ही खर्च घटाने और आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
कहां गया रेलवे का दावा
रेलवे अधिकारी दबी आवाज में इस बात को स्वीकारते हैं कि कंबलों को हरेक इस्तेमाल के बाद धुलने का दावा था लेकिन मंत्रालय स्तर पर इस बारे में कोई ठोस बातचीत ही नहीं हुई। यात्री भी रेलवे के ऐसे दावों को हवाहवाई ही मानते हैं।
लखनऊ से इन ट्रेनों में बंटता है कंबल
पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन से 4700 तो उत्तर रेलवे के चारबाग स्टेशन से 3490 लिनेन के पैकेटों की प्रतिदिन सप्लाई होती है। यह पुष्पक, गोमती एक्सप्रेस, कृषक, चंडीगढ़ एक्सप्रेस, काठगोदाम सहित अन्य ट्रेनों में सप्लाई किया जाता है। धुलाई के लिए चारबाग में तीन लॉन्ड्री हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
रेलवे बोर्ड से इस बारे में बातचीत हुई है। फिलहाल कुछ ठोस रूप से कह पाना मुश्किल है। रही बात कंबलों की धुलाई की तो इसके लिए सभी जोनों को ताकीद कर दिया गया है।
- नीरज शर्मा, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे