अंकित के पिता रामसुमेर की पहले ही मौत हो चुकी थी। अंकित ही खेती करके परिवार चलाने का काम करता था। भाई-बहन की मौत से मां उर्मिला के आंसू नहीं थम रहे हैं। मां दहाड़े मार कर रोते हुए कह रही हैं कि हमको पता होता तो हादसा हो जाएगा तो हम अपने बच्चों को कहीं न भेजते। अब वह किसके सहारे रहेंगी। दोनों की मौैत से ग्रामीण भी गमगीन हैं।
इंसानियत भी तार-तार, भूमि पर पड़ा रहा अंकित का शव
डलमऊ सीएचसी में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की संवेदनहीनता से इंसानियत तार-तार हो गई। अंकित का शव भूमि पर ही काफी देर तक पड़ा था। स्वास्थ्यकर्मियों ने शव को स्ट्रेचर पर रखने तक की जहमत नहीं उठाई। इससे पीड़ित परिवार व व्यापारियों में गहरी नाराजगी रही। सभी ने लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।