रायबरेली सड़क हादसे में चार की मौत हुई।
- फोटो : amar ujala
जिन बेटियों को पाल पोस कर बड़ा किया, उनके लिए सपने संजोए, एक दिन बेटियों के हाथ पीले कर उन्हें विदा करेंगे, लेकिन वाह री नियति, उसे कुछ और ही मंजूर था। जिनके लिए सपना देखा था, उनको काल लील गया। चार बेटियों के शवों के सफेद कफन में लिपटा देख माता पिता का कलेजा चित्कार कर उठा। इस मंजर के सामने पंछियों का कलरव भी मंद पड़ गया।
कार हादसे ने कोडर और अलीगंज डिगवा पाली गांव में मातमी सन्नाटा पसार दिया है। रविवार शाम से लेकर सोमवार शाम तक आसमां, शालिनी, रश्मि और हिमांशी के माता-पिता रोते बिलखते रहे। आंसू हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बिलख-बिलख कर जब पूरा परिवार रोते दिखा तो गांव के हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए। कोडर गांव का हाल यह है कि पूरा गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव के गलियारे जो कभी बच्चों के खेलकूद से खिलखिलाते थे, वह भी सूने रहे। चूली गांव का भी यही हाल है। लोगों के जेहन से हादसों की याद और भयावह मंजर हट नहीं रहा है।
घड़ी में भोर तीन बजते हैं और सायरन की आवाज गांव में गूंजते ही पूरा कोडर गांव जाग जाता है। जो गहरी नींद में थे, वह भी जागकर आसमां,शालिनी और रश्मि के घर की तरफ चल पड़ते हैं। तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस परिजनों को सौंपती है। बेटी का शव देखकर आसमां की संगीता और पिता विदेश शव को पकड़कर बिलख पड़ते हैं। बहन रेश्मा और भाई आशू के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कुछ ऐसा ही हाल शालिनी की मां लक्ष्मी देवी और पिता जंग बहादुर था। वह एक बेटी को खो चुके थे तो दूसरी बेटी साधना जिंदगी और मौत से जिला अस्पताल में संघर्ष कर रही है। रश्मि की मां राम प्यारी और पिता राम रतन भी चित्कार करते हुए रो रहे थे। लोग उन्हें समझा रहे थे, लेकिन वह विधाता और उसकी मर्जी की दुहाई दे रहे थे। बड़ी बहन राम प्यारी भी बहन के शव के लिपट कर रोए जा रही थी।
उधर हिमांशी के गांव अलीगंज डिगवा पाली में जब उसका शव पहुंचा तो मां रामकली, पिता दल बहादुर रोए जा रहे थे। गांव वाले उनको समझा रहे थे, लेकिन उनके मुंह से केवल यही शब्द निकल रहा था कि हमार बिटिया अब कबौ न मिली। यह का हुई गवा। जीजा अखिलेश और बहन करमावती भी बिलख रहे थे। बहन करमावती तो उस दिन को कोस रही थी कि जिस दिन हिमांशी उसके गांव कोडर आयी थी। करमावती कह रही थी कि हिमांशी तुम काहे हमरे घर आई, हम कबौ यह यह न भूल पाब कि तुम हमरे घर आई राहो और तुम हमार साथ छोड़कर चली गई। कोडर और अलीगंज डिगवा पाली गांव से जब बेटियों की अर्थियां उठी तो माहौल और भी गमगीन हो गया। हर शख्स रो रहा था।