पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर प्रमोशन पाने वाले सभी अफसर व कर्मचारी पदावनत किए जाएंगे। फिर चाहे वे किसी भी विभाग के क्यों न हों।
सिंचाई विभाग के 60 इंजीनियरों के डिमोशन के बाद राज्य सरकार अन्य विभागों में भी इस कवायद में जुट गई है। नियुक्ति विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव से 8 मई, 2012 के बाद शासन स्तर से लेकर जिले और अन्य स्तरों तक की गई सभी पदोन्नतियों का पूरा ब्यौरा तलब किया है।
नियुक्ति विभाग ने लिखी चिट्ठी में कहा है कि सारी सूचनाएं हर हाल में 10 अगस्त तक उपलब्ध करा दें। शासन के इस रुख से अन्य विभागों में कोटे से प्रोन्नति पाने वाले अफसरों-कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
5000 कर्मचारियों पर लटकी तलवार
अगर सरकार पदोन्नति में आरक्षण व परिणामी ज्येष्ठता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पूरी तरह अमल करती है तो अनुसूचित जाति के लगभग 5000 अधिकारियों व कर्मचारियों की पदावनति हो सकती है।
सिंचाई के अलावा बिजली, लोक निर्माण व्यापार कर, चिकित्सा, परिवहन, आबकारी विभाग व पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
प्रमुख सचिव राजीव कुमार ने सभी विभागीय पदों (समूह ‘क’ ‘ख’ एवं ‘ग’) पर की गई पदोन्नतियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि समूह ‘क’ में भी कई पद होते हैं।
मसलन, अधिशासी अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति, अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता-2 के पद पर पदोन्नति, मुख्य अभियता-2 से मुख्य अभियंता-1 के पद पर की गई पदोन्नति तथा मुख्य अभियंता-1 से प्रमुख अभियंता के पद पर की गई पदोन्नति को अलग-अलग मानते हुए गणना की जाएगी।
यानी, किसी कार्मिक की समूह ‘क’ के पदों पर ही एक से अधिक बार पदोन्नति हुई है तो उसकी गणना एक से अधिक बार की जाएगी। यही व्यवस्था समूह ‘ख’ एवं ‘ग’ के लिए भी होगी।