आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी की संदिग्ध हालात में मौत के 14 दिन बाद भी राजधानी की तेज-तर्रार पुलिस इस केस से जुड़े 14 अहम सवालों का जवाब नहीं तलाश सकी है। इस हाईप्रोफाइल मामले की विवेचना कर रही स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर रही है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जांच की संस्तुति होने के बाद से सुस्त एसआईटी एक-एक दिन करके अपना समय काट रही है। पुलिस अधिकारी भी चाहते हैं कि सीबीआई जल्द से जल्द इस केस को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दे। यही वजह है कि राजधानी का कोई भी पुलिस अधिकारी अनुराग की मौत की गुत्थी सुलझाने को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा।
आईएएस के परिवारीजनों ने 14 ऐसे सवाल उठाए हैं जिनके जवाब उनकी मौत की वजहों को काफी हद तक स्पष्ट कर देते। हालांकि, पुलिस इन सवालों को लेकर कतई गंभीर नहीं नजर आ रही है। बड़े भाई मयंक का कहना है कि 17 मई की सुबह जब अनुराग का शव मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्टहाउस के पास पड़ा मिला तब पुलिस को यह नहीं पता था कि मरने वाला कौन था? लापरवाह पुलिस मरने वाले को सामान्य व्यक्ति समझकर औपचारिकता निभाती रही।
चंद घंटों बाद पुलिस को पता चला कि शव आईएएस अधिकारी का है। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों का रवैया नहीं बदला। बकौल मयंक, अब तो विवेचना की स्थिति और भी चिंताजनक होती जा रही है। एसआईटी बहराइच आई और उनका बयान दर्ज किए बिना लौट गई। उन्होंने कहा, आईएएस की मौत की जांच में राजधानी पुलिस से जिस गंभीरता की अपेक्षा जताई जा रही थी, वह कहीं नहीं दिख रही।
पुलिस ने मयंक की तरफ से हजरतगंज कोतवाली में अनुराग की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली पर विवेचना सुस्त गति से कर रही है। कहा कि पुलिस के इसी रवैए के नाते सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई थी। कहीं ऐसा न हो कि सीबीआई के केस अपने हाथ में लेने में इतना वक्त लग जाए कि अहम साक्ष्य नष्ट अथवा छिन्न-भिन्न हो जाएं।
अनुराग की मौत के अहम सवाल
अनुराग तिवारी
- फोटो : amar ujala
-शव की मूल स्थिति में फोटो और वीडियोग्राफी पुलिस ने क्यों नहीं कराई ?
-सड़क पर पडे़ शव की सूचना मिलने व अस्पताल पहुंचने की टाइमिंग में गड़बड़ी क्यों दिखाई ?
- एफआईआर दर्ज कराने वाले बड़े भाई मयंक का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज किया ?
-शव की सूचना देने वाले कॉल सेंटर कर्मचारी से पुलिस ने क्यों संपर्क नहीं किया ?
-पोस्टमार्टम करने वाले केजीएमयू के फोरेंसिक हेड सहित अन्य डॉक्टरों के बयान क्यों नहीं हो रहे ?
-मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड की जांच कराने में आखिर क्यों रुचि नहीं दिखा रही पुलिस ?
-विसरा परीक्षण के लिए एकत्र किए गए सैंपल फोरेंसिक लैब क्यों नहीं भेजे जा रहे ?
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर विशेषज्ञ चिकित्सकों व फोरेंसिक एक्सपर्ट्स से राय क्यों नहीं ली गई ?
-केजीएमयू में रखे हार्ट की जांच के लिए आखिर किसका इंतजार किया जा रहा ?
-मोबाइल की कॉल डिटेल और चैट रिकॉर्ड में सामने आए तथ्यों को क्यों दबाए बैठी है पुलिस ?
-परिवारीजन दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहते थे तो पुलिस ने उनका साथ क्यों नहीं दिया ?
-बंगलूरू जाकर आईएएस के घर व दफ्तर की पड़ताल अभी तक क्यों नहीं की गई ?
-कमरे में मिले सिगरेट के बट्स की विशेषज्ञ एजेंसी से जांच क्यों नहीं कराई गई ?
-कर्नाटक सरकार से संपर्क करके घोटाले की शिकायतों के बारे में क्यों जानकारी नहीं ली गई ?