पीडब्ल्यूडी में तबादलों में गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, जिस अधीक्षण अभियंता (अधिष्ठान) अनिल कुमार श्रीवास्तव को दोषी बताया गया है, उस नाम का विभाग में कोई अभियंता ही नहीं हैं। यह गोपनीय रिपोर्ट सामने आने पर विभागीय अधिकारी भी हैरान हैं।
इस मामले में एपीसी मनोज कुमार सिंह की कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विभागाध्यक्ष समेत पांच अधिकारी व कर्मचारी सस्पेंड हो चुके हैं। इस रिपोर्ट के पेज संख्या 16 पर लिखा है कि अधीक्षण अभियंता (अधिष्ठान) अनिल कुमार श्रीवास्तव 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने सहायक अभियंताओं का स्थानांतरण व तैनाती का आदेश बैक डेट में किया। मगर, आदेश दो से पांच जुलाई के बीच जारी किया।
रिपोर्ट के इसी पैरा में आगे लिखा है कि विभागाध्यक्ष के कार्यालय के डिस्पैच रजिस्टर के परीक्षण में पाया गया कि जो आदेश 29 व 30 जून के दिखाए गए हैं, वे डिस्पैच रजिस्टर में 2, 3, 4 व 7 जुलाई को जारी किए गए हैं। यह बैक डेटिंग की ओर इशारा तो करता है, पर बहुत ठोस रूप में इसे साबित नहीं किया जा सकता।
खास बात यह है कि कमेटी ने रिपोर्ट के पेज 18 पर जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की थी, उसमें भी अनिल कुमार श्रीवास्तव का नाम दर्ज किया है। जब रिव्यू के लिए रिपोर्ट मुख्यालय पहुंची तो जांच करने वाले अधिकारी भी चकरा गए। इनमें से एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि इस नाम का तो पूरे विभाग में कोई अधीक्षण अभियंता ही नहीं है। रिपोर्ट में ऐसा कैसे हुआ, इसकी पड़ताल किए जाने की जरूरत है।
31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए पीडब्ल्यूडी के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष सत्यप्रकाश का कहना है कि ‘हमसे अधीक्षण अभियंता (अधिष्ठान) अनिल कुमार श्रीवास्तव के बारे में पूछा गया था। रिपोर्ट भेज दी है कि इस पदनाम का कोई अधीक्षण अभियंता मुख्यालय में तैनात नहीं है।’