बस्ती जिले में कागजों पर ही 300 से ज्यादा सड़कें बनी दिखाकर 40 करोड़ हड़पने वाले पीडब्ल्यूडी विभाग की एक और कारस्तानी महाराजगंज में सामने आई है। केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग का एक ऐसा हिस्सा निर्माण के लिए मंजूर करा लिया, जोकि मौके पर है ही नहीं।
एस्टीमेट में इसकी लागत 27 करोड़ रुपये दिखाई गई है। इस प्रकरण में दोषी इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। मामला महराजगंज में एनएच-730 के रामनगर से सिसवा बाबू सेक्शन का है।
यहां वर्ष 2017 में 21.12 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के लिए 206.12 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेजी गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 21.12 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण के लिए 185.18 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी कर दी।
इसी आधार पर टेंडर भी हो गया। हालांकि हकीकत में सड़क के इस भाग की लंबाई कुल 18.39 किलोमीटर ही है। इस तरह से एस्टीमेट में 2.73 किलोमीटर सड़क ज्यादा दिखाई गई। इस तरह से डीपीआर गलत प्रस्तुत की गई। ज्यादा दिखाए गए इस हिस्से की लागत 26.9432 करोड़ रुपये दर्ज की गई।