कानपुर के पुखरायां में हुए रेल हादसे का मास्टरमाइंड बताए जा रहे आईएसआई एजेंट शम्सुल हुदा को नेपाल पुलिस ने काठमांडू एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया है। हादसे को अंजाम देने के लिए आईएसआई के इशारे पर शम्सुल ने फंडिंग की थी। इस रेल हादसे में 152 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों यात्री घायल हो गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) इस हादसे की जांच कर रही है।
नेपाल की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईबी, रॉ और एनआईए की टीम ने शम्सुल से पूछताछ की है। हालांकि शम्सुल को नेपाल में दो भारतीय नागरिकों की हत्या के सिलसिले में तीन अन्य के साथ गिरफ्तार किया।
नेपाल पुलिस के आईजी पशुपति उपाध्याय ने बताया कि होदा को सोमवार को काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। होदा को इंटरपोल की मदद से बृजकिशोर गिरि, आशीष सिंह और उमेश कुमार कुर्मी के साथ गिरफ्तार किया गया।
होदा से पूछताछ के बाद नेपाल पुलिस ने पांच नेपाली नागरिकों को हिरासत में लिया है। ये पांचो पुखरायां रेल हादसे में संलिप्त बताए जा रहे हैं।
ऑडियो टेप से मिला पुखरायां हादसे का लिंक
मोतिहारी पुलिस को उमाशंकर के मोबाइल में एक ऑडियो भी मिला था, जिसमें बृजकिशोर गिरि कह रहा था कि तुमलोग कुछ नहीं कर पाए और कानपुर में देखो सिर्फ नट-बोल्ट निकाल कर ही काम हो गया।
इसी ऑडियो टेप के आधार पर शम्सुल को पुखरायां रेल हादसे का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उमाशंकर के साथ पकड़े गए मोती ने पुखरायां रेल हादसे को अंजाम देने की बात कुबूल की थी।
शम्सुल हुदा नेपाल के जिला बारा में कलैनिया गांव का रहने वाला है और बृजकिशोर गिरि भी इसी गांव का है। शम्सुल पर आईएसआई के इशारे पर भारत में फेक करेंसी के कारोबार का भी आरोप है। उसके दो साथियों जुबेर और जियाउल हक को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
ऐसे खुली थी परतें
यूपी एटीएस के अनुसार बिहार में गिरफ्तार तीन युवकों मोती पासवान, मुकेश यादव और उमाशंकर पटेल ने कुबूला था कि वे आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। पुखरायां रेल हादसे के लिए एक नेपाली नागरिक ने उन्हें तीन लाख रुपये दिए थे। वह आईएसआई के लिए काम करता था।
नेपाल में लड़ चुका है चुनाव
पुखरायां रेल हादसे का मुख्य संदिग्ध शम्सुल नेपाल में राष्ट्रीय मधेस समाजवादी पार्टी से असेंबली चुनाव लड़ चुका है। उसे सिर्फ 63 वोट मिले थे। वह 2001 से 2013 तक मलेशिया में कारोबार कर चुका है।
वह करीब 19 माह पहले टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया था, जहां पाकिस्तानी नागरिक सफी के संपर्क में आया। यहां पैसों के चक्कर में उसने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी समूह से हाथ मिला लिया।