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लोकायुक्त जी! 'माया' पर इतनी मेहरबानी क्यों?

Sun, 30 Nov 2014 02:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मायावती सरकार में नोएडा के फार्म हाउस आवंटन में धांधली की शिकायतों की लोकायुक्त द्वारा की जा रही जांच समाप्त कर दी गई है।
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औद्योगिक विकास विभाग का दावा है कि मामले में लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा की सिफारिशों पर अमल करा दिया गया है।

लोकायुक्त की जांच में फार्म योजना और भूखंडों के  मूल्यांकन आदि में कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फार्म हाउस आवंटित कराए जाने की आशंका जरूर जताई गई थी।

नोएडा अथॉरिटी ने फार्म हाउस के सभी आवंटियों के आवेदनों का नए सिरे से परीक्षण कराकर फर्जी दस्तावेजों व गलत तथ्यों के आधार पर किए आवंटन को निरस्त करके इसकी सूचना शासन और लोकायुक्त को भेज दी।

इसके बाद औद्योगिक विकास विभाग द्वारा 27 नवंबर को मामले की जांच समाप्त करने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया।

गौरतलब है कि 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अगस्त 12 में नोएडा के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश बहादुर की एक रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने लोकायुक्त को फार्म हाउस आवंटन मामले की जांच सौंपी थी।
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ये नए सवाल हो गए खड़े

लोकायुक्त जांच में राकेश बहादुर की तथ्यात्मक रिपोर्ट तो आधारहीन पाई गई है। अलबत्ता आवंटन की प्रक्रिया को लेकर जरूर लोकायुक्त ने सवाल खड़े किए और नोएडा प्राधिकरण को दोबारा आवेदन पत्रों की जांच कराकर उन लोगों को भी मौका देने की सिफारिश अपनी रिपोर्ट में की, जिन्हें फार्म हाउस आवंटित नहीं हो पाए थे।

लोकायुक्त ने मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को तो क्लीनचिट दी ही है, किसी और को भी दोषी नहीं ठहराया। लोकायुक्त की रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि फार्म हाउस की भू-दर निर्धारित करने में शासन या नोएडा अथॉरिटी को कोई आर्थिक हानि नहीं हुई है।

पूरे मामले में नोएडा में कार्यरत अधिकारियों, अन्य लोकसेवकों और व्यक्तियों के बीच कोई षड्यंत्र नहीं पाया गया।

लोकायुक्त का कहना है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में छह संस्तुतियां की थीं। इनमें तीन संस्तुतियां ऐसी थीं जिन पर नोएडा प्राधिकरण को अमल करना था।

नोएडा प्राधिकरण ने इन तीनों पर कार्रवाई करके शासन को अनुपालन रिपोर्ट भेज दी है। इसी आधार पर जांच बंद करने का आदेश जारी किया गया है।
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