लखनऊ। लखीमपुर खीरी के सतीश की जनरल सर्जरी विभाग में ऑपरेशन से पहले पीटीपीसी-आईएनआर जांच लिखी गई, लेकिन बलरामपुर अस्पताल की पैथोलॉजी में जांच ठप होने के कारण उन्हें निजी केंद्र जाना पड़ा, जहां उन्होंने 400 रुपये खर्च कर जांच कराई। चारबाग निवासी विनोद की भी यही स्थिति रही। जांच अस्पताल में नहीं हुई, तो उन्हें भी बाहर निजी केंद्र का सहारा लेना पड़ा।
राजधानी के बलरामपुर अस्पताल में खून का थक्का जमने की स्थिति का पता लगाने वाली पीटीपीसी-आईएनआर जांच एक सप्ताह से ठप है। ऐसे में मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन को शिकायतें मिलने के बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
ऑपरेशन से पहले जरूरी होती है यह जांच
अस्पताल में 778 से अधिक बेड हैं और ओपीडी में हर दिन पांच से सात हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं, 30-35 मरीजों को ऑपरेशन किया जाता है, जिनकी पीटीपीसी-आईएनआर जांच कराई जाती है। इस जांच से खून के थक्के जमने की प्रवृत्ति का पता चलता है और रिपोर्ट के आधार पर ही ऑपरेशन की अनुमति दी जाती है।
रीजेंट खत्म, मेडिकल कॉर्पोरेशन से रिन्यूअल अटका
डॉक्टरों के अनुसार, जांच में इस्तेमाल होने वाला रीजेंट खत्म होने के कारण एक हफ्ते से बंद है। अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) से इस जांच में इस्तेमाल होने वाले रीजेंट का रिन्यूअल लंबित है। रिन्यूअल प्रक्रिया पूरी न होने से अस्पताल को नया स्टॉक नहीं मिल पा रहा। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यदि मेडिकल कॉरपोरेशन से जल्द आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो अन्य अस्पतालों में भी यह जांच प्रभावित हो सकती है।