राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने किसान आंदोलन में शामिल लोगों को उग्रवादी व आंदोलनजीवी बताने पर आपत्ति जताते हुए देश के किसानों के नाम खुला पत्र लिखा है। अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या में लिखे पत्र में उन्होंने ने कहा है कि केंद्र की घमंडी सरकार किसानों के दर्द का मजाक बना रही है। उन्होंने किसानों को सचेत किया कि आने वाले समय में उनकी एकता तोड़ने के और प्रयास होंगे।
अजित ने कहा, जब लोकदल के नेतृत्व का झंडा उन्हें सौंपा गया तब उन्होंने किसानों की समस्याओं को करीब से जानने के लिए 9 सितंबर, 1988 से 9 अक्टूबर, 1988 तक मेरठ से लखनऊ तक पद यात्रा की थी। उन्होंने किसानों के हित के लिए खुद और अपनी पार्टी द्वारा किए गए प्रयासों को याद दिलाया है। रालोद अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि आज किसान के सामने दोहरा संकट है। एक ओर केंद्र सरकार ऐसे कानून बना रही है जो किसानों को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं, तो दूसरी ओर किसानों के लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को कुचला जा रहा है।
कुछ पूंजीपतियों के स्वार्थ साधने के लिए सरकार किसानों के विरुद्ध खुला युद्ध लड़ रही है। याद करना चाहिए कि हमने मिलकर गन्ना मूल्य (नियंत्रण) संशोधन आदेश 2009 का विरोध दिल्ली की सड़कों पर किया था। इसके बाद केंद्र को इसे पारित करने का इरादा छोड़ना पड़ा था। भूमि अधिग्रहण कानून को भी सरकार पर दबाव बनाकर बदलवाया। मैं और रालोद का प्रत्येक कार्यकर्ता हर कदम पर किसानों के साथ थे, हैं और रहेंगे।