331 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान में लेते हुए कार्यरत शिक्षकों के विनियमितीकरण की मांग को लेकर धरना एवं क्रमिक भूख हड़ताल आज 74वें दिन भी जारी रही।
लेकिन सरकार का कोई भी प्रतिनिधि इनकी सुधि लेने नहीं आया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. के.एस पाठक ने कहा कि सरकार बार-बार मुस्लिम हितैषी होने का दावा करती है लेकिन सैकड़ों मुस्लिम डिग्री शिक्षक इस व्यवस्था में फंसे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आजम खां विगत दिनों लिखित आश्वासन भी दे चुके हैं लेकिन उन्होंने भी इन शिक्षकों की कोई सुधि नहीं ली।
रायबरेली के डॉ. अहमद काजमी ने कहा कि सरकार की सद्बुद्धि के लिए आज मुस्लिम डिग्री शिक्षकों ने दुआ किया और मजलिस का आयोजन कर तबर्रूक (प्रसाद) बांटा ताकि मुस्लिम समुदाय से इस व्यवस्था में फंसे सैकड़ों डिग्री शिक्षकों का कल्याण हो सके।
अवध विश्वविद्यालय के डॉ. अकबर मुजफ्फर मेंहदी ने कहा कि सरकार केवल मुसलमानों के हितैशी होने का दावा करती है अगर वह वास्तव में मुसलमानों का हित चाहती है तो उसे इन शिक्षकों से वार्ता कर समस्या का हल कर देना चाहिए।
आर.आर पी.जी कॉलेज अमेठी के डॉ. डी.पी सिंह ने कहा कि सरकार बार-बार हमारे धैर्य की परीक्षा न लें क्योंकि यदि धैर्य टूटा तो सरकार भी नहीं बच पाएगी।
इन्दिरागांधी पीजी कॉलेज अमेठी से आए डॉ.महेन्द्र द्विवेदी ने सरकार को तानाशाह की संज्ञा दी।
लखनऊ के कोषाध्यक्ष डॉ. मोहनलाल मौर्या ने कहा कि यह आन्दोलन जन आन्दोलन का रूप ले चुका है। हमारी मांगे जबतक पूरी नहीं होंगी हम वापस नही जाएंगे।
संयुक्त मंत्री डॉ. अनित श्रीवास्तव एवं डॉ. राकेश कुमार ने सरकार से जल्द से जल्द शासनादेश जारी करने की मांग की। पूर्वांचल विश्वविद्यालय से आए डॉ. नितेश यादव ने सरकार पर इन शिक्षकों की अनदेखी का आरोप लगाया।