प्रदर्शन के कारण मरीजों व उनके परिजनों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा बीते पांच दिनों से हर दिन दो घंटे के लिए चल रहे कार्य बहिष्कार को स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। प्रमुख सचिव के आश्वासन के बाद स्वास्थ्यकर्मी मान गए और हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया। रविवार को चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ व प्रमुख सचिव के साथ हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य कर्मी तबादला नीति में संशोधन व अन्य मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे थे। पांचवें दिन शनिवार को भी महासंघ के आह्वान पर कर्मचारियों ने दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया गया। सुबह आठ से 10 बजे तक कार्य बहिष्कार से ओपीडी से लेकर जांच तक की सुविधाएं ठप रहीं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। 11 बजे से काम शुरू हुआ, लेकिन पर्चा काउंटर से लेकर उपचार व जांच के लिए मरीजों को लंबी कतार से जूझना पड़ा।
चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के महासचिव अशोक कुमार ने बताया कि नीतिगत तबादले स्थगित करने, कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष एवं मंत्रियों को तबादले के दायरे से बाहर रखने, पूर्व में स्थानांतरित कर्मियों को तबादला भत्ता देने, उच्चीकृत जिला अस्पतालों के मेडिकल कॉलेज बनने पर वहां से स्थानांतरित कर्मियों को समायोजित करने जैसी मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन चल रहा है। लेकिन अब तक महासंघ की मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने दो घंटे के कार्य बहिष्कार का निर्णय किया ।
उन्होंने कहा था कि शासन-प्रशासन हठधर्मिता कर रहा है। ऐसे में जल्द ही कर्मचारी उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। कार्य बहिष्कार का प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ, राजकीय नर्सेज संघ, राजपत्रित डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ, सहायक प्रयोगशाला संघ, एक्स-रे टेक्नीशियन एसोसिएशन, डार्क रूम असिस्टेंट एसोसिएशन, टीबी कंट्रोल इंप्लाइज एशोसिएशन सहित अन्य संगठनों ने समर्थन किया था।