लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह से पहले जारी प्रस्तावित मेडल सूची में बेटियों की मेधा ने स्वर्णिम छाप छोड़ी है। 31 जुलाई को होने वाले दीक्षांत समारोह में कुल 194 मेडल दिए जाएंगे। इनमें सबसे अधिक नौ-नौ स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में अंशिका सिंह और फराह चांद के नाम शामिल हैं। वहीं, एलएलबी में शानदार प्रदर्शन करने वाले शिखर भारती भी नौ स्वर्ण पदक हासिल करेंगे। इस तरह प्रस्तावित सूची में शीर्ष उपलब्धियों में छात्राओं की मौजूदगी खास तौर पर उभरकर सामने आई है।
प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व से एमए की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली अंशिका सिंह को नौ स्वर्ण पदक मिलेंगे। बीए की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली फराह चांद भी नौ स्वर्ण पदक अपने नाम करेंगी। विधि की पढ़ाई में शिखर भारती ने वर्ष 2026 की एलएलबी (तीन वर्षीय पाठ्यक्रम, प्रथम से छठे सेमेस्टर) की परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने संपूर्ण पाठ्यक्रम की मेरिट सूची में शीर्ष स्थान और सर्वोच्च अंक हासिल करते हुए कुल नौ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है।
स्वर्णिम उपलब्धियों की इस सूची में भौतिक विज्ञान विभाग की काजल बाजपेयी भी पीछे नहीं हैं। वर्ष 2026 की एमएससी (प्रथम से चतुर्थ सेमेस्टर) की परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए उन्होंने सात स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं।
विवि के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि अभी यह प्रस्तावित मेडल सूची है। इसमें बदलाव संभव है।
मेडल सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट lkouniv.ac.in पर अपलोड कर दी गई है। पदकों के संबंध में कोई सुझाव या आपत्ति हो तो 27 जुलाई की शाम पांच बजे तक दर्ज कराई जा सकती है। आपत्ति ईमेल coelkouniv.ac.in या वैकल्पिक रूप से मोबाइल नंबर 7991200506 पर दर्ज कराई जा सकती है।
प्रसिद्ध लेखक बनकर दुनिया में नाम कमाने का लक्ष्य : फराह चांद
मैंने लविवि से बीए की परीक्षा में सफलता हासिल की है। इसके लिए मेरे खाते में नौ स्वर्ण पदक दर्ज हुए हैं। मुझे किताबें लिखने का बहुत शौक है। आगे चलकर एक अच्छे राइटर के रूप में काम करना चाहती हूं। मैंने जो किताबें लिखी हैं, उनमें इकबाल की शायरी और बालेन्दु द्विवेदी के उपन्यास ''बादशाह सलामत हाजिर हों'' का उर्दू अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। काकोरी के फारसी भाषा के लेखक और कवि पर आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित होने वाली है। मेरे पिता डॉ. असलम मुर्तजा भी 2004 में लविवि से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। वह भी लेखक हैं। वहीं, मां चांद बानो पूर्व प्रधान रह चुकी हैं।
आईएएस बनकर देश सेवा करना है लक्ष्य : अंशिका सिंह
मैंने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग से एमए किया है। सूची जारी होने के बाद पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ कि मेरे नाम से नौ मेडल हैं। मुझे बहुत खुशी है। मेरा आगे का लक्ष्य आईएएस बनकर देश की सेवा करना है। मेरे पिता उदयनाथ सिंह पुलिस विभाग में हैं और इस समय सीएम सुरक्षा में तैनात हैं। मां वंदना सिंह गृहिणी हैं। मैंने कड़ी मेहनत के बजाय स्मार्ट वर्क, अनुशासन, फोकस और लगन पर ध्यान दिया। दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी मैं कहना चाहती हूं कि बेहतर उत्तर लिखें, क्योंकि परीक्षा में आप कैसे लिखते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है।
कानूनी रूप से लोगों की मदद करना है लक्ष्य : शिखर भारती
मैंने लविवि से तीन वर्षीय एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। इसके लिए मुझे नौ स्वर्ण पदक मिलेंगे। मेरा लक्ष्य वकालत के पेशे में जाना है, जहां जरूरतमंदों की मदद करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। मैं यूपीएससी की भी तैयारी कर रहा हूं। मेरे पिता अजय पाल प्राइमरी विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। मेरी मां पुष्पा देवी गृहिणी हैं। मैंने इस सफलता के लिए हर दिन मेहनत से पढ़ाई की। मैं लोगों से भी यही कहना चाहता हूं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
रेगुलर क्लास और नोट्स बनाकर की पढ़ाई : काजल बाजपेयी
मैंने लविवि के फिजिक्स विभाग से एमएससी की पढ़ाई कर परीक्षा में सफलता हासिल की है। इसके लिए मुझे सात स्वर्ण पदक मिलेंगे। मैं आगे चलकर प्रोफेसर बनना चाहती हूं। मेरे पिता शिवकांत बाजपेयी प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां नीता बाजपेयी गृहिणी हैं। मैंने विश्वविद्यालय की रेगुलर कक्षाओं के साथ-साथ घर पर भी पढ़ाई पर फोकस किया। सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दिया। नोट्स बनाकर पढ़ाई की, जिसका मुझे बहुत फायदा मिला।