वर्षों पहले दिवंगत हो चुके जमींदारों की कीमती जमीन फर्जी तरीके से बेचने वाले जालसाजों ने मोहनलालगंज में एक कारनामा अंजाम दिया।
जमींदार की मौत के 35 साल बाद उसे जीवित बताते हुए फर्जी कागजात के सहारे करीब दो बीघा जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई।
जमीन इलाके के एक बड़े कारोबारी ने खरीदी। जालसाजी उजागर होने के बाद छानबीन के लिए पुलिस अब कारोबारी की तलाश कर रही है।
जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब 30-35 लाख रुपये कीमत की जमीन के दाखिल-खारिज के लिए मोहनलालगंज तहसील में मुकेश कुमार जिंदल ने आवेदन किया।
जिंदल ने बताया कि उन्होंने पचौरी गांव स्थित जमीन हुलास खेड़ा निवासी ज्वाला सिंह से खरीदी है। मुकेश कुमार जिंदल प्लाईवुड के कारोबारी हैं।
उनके आवेदन पर दाखिल-खारिज के लिए जमीन की मौजूदा स्थिति के बारे में लेखपाल से रिपोर्ट मांगी गई।
जांच के दौरान पता चला कि ज्वाला सिंह का करीब 35 पहले निधन हो चुका है। उनके पुत्र राजेंद्र सिंह अध्यापन कार्य के चलते उन्नाव जनपद के भगवंतनगर में रहते थे।
छानबीन में फर्जी तरीके से उनकी जमीन की रजिस्ट्री का खुलासा हुआ। लेखपाल की रिपोर्ट मिलते ही तहसीलदार ने दाखिल-खारिज की कार्रवाई रोक दी।
ज्वाला सिंह के पौत्र ज्ञानेंद्र ने तहसील में अपनी आपत्ति दाखिल करने के साथ एफआईआर के लिए मोहनलालगंज कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया है।
ज्ञानेंद्र ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्री के मामले में जिंदल पर जालसाजी का संदेह जताया है। पुलिस ने पूछताछ के लिए जिंदल को तलब किया तो पता चला कि मामला उजागर होते ही वह गायब हो चुका है।
पुलिस का कहना है कि जालसाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। जिंदल का नाम पिछले दिनों मोहनलालगंज कस्बे से लगी झील की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने के मामले में सामने आया था।
उक्त जमीन पर जिंदल की प्लाईवुड फैक्ट्री चल रही है। इस मामले में एसडीएम ने अन्य लोगों के साथ जिंदल को भी तलब किया था। जांच की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है।