यह गुहार किसी और की नहीं बल्कि कई आईपीएस अफसरों की है जो प्रोन्नति समिति की बैठक न होने से दुखी थे।
उनका मानना था कि एक प्रभावशाली अफसर के दखल की वजह से बैठक नहीं हो पा रही है। लेकिन पिछले दिनों हुए तबादलों की सूची देख उन्हें कुछ राहत महसूस हुई।
प्रभावशाली अफसर के खास लोगों की मनचाही तैनाती नहीं हो सकी। इसे लेकर आशान्वित हुए आईपीएस अफसरों की पौ तब बारह हो गईं जब राज्य सरकार ने एकाएक उनके दो बैच की डीपीसी कर दी।
अब वरिष्ठता हासिल करने के बाद उस पद के लिए मारामारी मचेगी, जिस पर प्रभावशाली अधिकारी जमे हुए हैं।
इसी पर चर्चा के दौरान कुछ एक आईपीएस अधिकारी सहसा ही बोल उठे आखिर कब पसीजेंगे देवता। जब वह हटेंगे तभी तो अपना नंबर आएगा।