रिटायरमेंट के साढ़े तीन साल बाद सिंचाई विभाग के एक इंजीनियर को आखिरकार प्रमोशन मिल ही गया।
विभागीय लापरवाही के कारण डीपीसी होने के बावजूद आदेश जारी ही नहीं किए गए थे। इससे पदोन्नति मिलने से पहले ही वे रिटायर हो गए। अदालत के सख्त रुख के बाद अभियंता को बैक डेट से नोशनल प्रमोशन देना पड़ा।
सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे लोकेश दत्त शर्मा वर्ष 2010 में रिटायर हो गए थे। शर्मा अधीक्षण अभियंता पद के लिए अर्हता पूरी कर चुके थे।
विभाग ने अधिशासी अभियंता से अधीक्षण अभियंता पद के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक तो कराई, लेकिन आदेश जारी नहीं किए। इस कारण शर्मा बगैर प्रमोशन पाए ही रिटायर हो गए।
बाद में शर्मा ने न्यायालय का सहारा लिया। इसमें न्यायालय ने विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए कहा तो सिंचाई विभाग ने माना कि डीपीसी तो हो गई थी, लेकिन इसमें एक अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हुए थे। इस कारण आदेश जारी नहीं हो सके थे। न्यायालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और प्रमोशन देने के लिए कहा।
न्यायाल के आदेश पर अमल नहीं हुआ तो शर्मा ने अवमानना वाद दाखिल किया। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी हरकत में आए।
प्रमुख सचिव दीपक सिंघल ने लोकेश दत्त शर्मा के मामले में 4 मार्च 2010 से अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रमोशन दे दिया। इसके आदेश भी विभाग ने जारी कर दिए हैं।
विभाग ने बैक डेट से आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन अब लोकेश दत्त शर्मा को इसका फायदा पेंशन के रूप में होगा। उन्हें बढ़ी हुई पेंशन का एरियर दिया जाएगा।
साथ ही रिटायरमेंट से पहले का अतिरिक्त वेतन भी एरियर के रूप में उन्हें मिलेगा। यही आदेश विभाग ने यदि समय रहते कर दिया होता तो वे अधीक्षण अभियंता पद धारित करने के बाद ही रिटायर होते।
पद खाली होने के बावजूद नहीं मिला प्रमोशन
सिंचाई विभाग में कई ऐसे भी अधिकारी हैं, जिन्हें डीपीसी न होने के कारण पदोन्नति नहीं मिल सकी। अधीक्षण अभियंता बेचन शाह इसी साल 31 जुलाई को रिटायर हुए। वहीं रमण कुमार श्रीवास्तव 30 सितंबर तो सुरेश चंद पांडेय 31 अक्तूबर को रिटायर हुए हैं।
डीपीसी न होने के कारण तीनों ही अधीक्षण अभियंताओं को मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। जबकि विभाग में मुख्य अभियंता के पद खाली पड़े हैं।
रवि शंकर भी अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता बने बगैर ही रिटायर हो गए। अधिशासी अभियंता धुरंधर सिंह व विजय प्रकाश शुक्ला भी 30 जून को बगैर प्रमोशन पाए रिटायर हो गए। दोनों ही अधीक्षण अभियंता नहीं बन पाए।