वाणिज्यकर विभाग ने जांच के नाम व्यापारियों के उत्पीड़न की शिकायतों को देखते हुए सचल दल की जांच व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला किया है। तय किया गया है कि सचल दल इकाइयां अब निर्धारित मार्ग पर ही कर चोरी की जांच करेंगी। जबकि पहले उन्हें किसी भी रास्ते पर जांच करने की छूट थी। वाणिज्यकर आयुक्त मिनिस्ती एस ने सचल दल इकाइयों की मनमानी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जांच के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
गौरतलब है कि आगरा में वाणिज्यकर अधिकारियों पर बिहार से माल ला रहे मथुरा के एक व्यापारी से 43 लाख रुपये छीनने का आरोप लगने के बाद विभाग की छवि पर सवाल उठने लगे हैं। इस तरह अन्य शिकायतें भी अकसर मुख्यालय पहुंचती है। इनमें से सर्वाधिक सचल दल इकाइयों से संबंधित होती हैं। इसे देखते हुए वाणिज्यकर आयुक्त ने सचल दल की जांच की व्यवस्था को और पारदर्शी व जवाबदेह बनाने का फैसला किया है।
नए दिशा-निर्देश के मुताबिक जांच पर जाने से पहले सचल दल इकाइयों को जोनल कार्यालय के रजिस्टर पर यह अंकित करना होगा कि किस रूट पर जांच करने जा रही हैं। यही नहीं इसके अफसरों को कार्यालय से निकलते समय दल के सभी सदस्यों के नाम भी लिखकर देने होंगे। मौके पर पहुंच कर फोन से यह बताना होगा कि कितने बजे वहां पर पहुंचे। निर्धारित स्थान पर जांच के बाद अगर दूसरे स्थान पर जाना है तो इसके लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। जिससे किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न होने पाए। जांच खत्म होने पर कार्यालय लौटने की सूचना उच्चाधिकारियों को देने और लौटने का समय रोड चेकिंग रजिस्टर पर दर्ज करना होगा।
सचल दल में शामिल अधिकारियों को जांच के दौरान बॉडीवार्न कैमरा का उपयोग करना होगा। इसके साथ ही संबद्ध वाहन में वीटीएस को भी चालू रखा जाएगा। मालयुक्त वाहनों की जांच के समय कागजातों का मोबाइल एप से सत्यापन किया जाएगा। प्रदेश में मौजूदा समय सचल दल इकाई में 450 अफसर हैं।