लोगों ने इस्लाम में औरतों की स्थिति को लेकर तरह-तरह के अफवाहें फैलाई हैं। कहा जाता है कि इस्लाम में औरतों पर जुल्म किया जाता है। यह पूरी तरह गलत है। इस्लाम औरतों को सम्मान के नजरिए से देखता है। परिवार में पुरुषों की तरह महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है। तीन तलाक को लेकर लोगों में तमाम भ्रांतियां है जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। तलाक के दौरान भी दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर घर को टूटने से बचाने का प्रयास किया जाता है।
ये बातें मदरसा फखरुल उलूम के प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद वहाब ने अमर उजाला की मुहिम अपराजिता के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन नगर के मोहल्ला बलुहा स्थित दारुल उलूम इमाम-ए-आजम लिलबनात मदरसे में रविवार को अपराजिता 100 मिलियन इस्माल्स के तहत किया गया। परिचर्चा में शिक्षक, समाजसेवी एवं धर्म गुरुओं ने मुस्लिम बेटियों की तरक्की के लिए उनके कर्तव्य और अधिकार बताएं।
कार्यक्रम में जामिया अरबिया अनवारुल कुरान अरबी डिग्री कालेज के प्रबंधक डॉ. इकबाल खान ने कहा कि मुस्लिम बच्चियों की जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए अच्छी शिक्षा व संस्कार जरुरी है। बच्चियां शिक्षित होंगी तभी परिवार विकास करेगा। बच्चियों के अच्छे संस्कार से परिवार में खुशहाली आती है। अच्छी तालीम हासिल करके बेटियां परिवार की तरक्की के साथ-साथ मुल्क के विकास में भी योगदान कर सकती है। तमाम बेटियों ने अपने कार्यो से परिवार ही नहीं बल्कि देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। ऐसे लोगों से प्रेरणा लेकर बेटियां खुद भी तरक्की के रास्ते पर चलने का प्रयास करें।