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शहादत का मूल्य समझना जरूरी

Fri, 20 Dec 2013 10:05 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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शहीदों ने कुर्बानी दी, ताकि देश आजाद हो सके। लेकिन क्या हम उनके बलिदान का मूल्य समझ रहे हैं। जवाब है, नहीं।
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अफसोस है कि हम आजादी के मूल्यों को तिरस्कृत करने पर तुले हैं। लोगों की सोच व्यक्तिवादी हो गई। जबकि राष्ट्रहित को लोगों ने नेपथ्य में ढकेल दिया है।

कुछ ऐसे ही सवाल काकोरी कांड के महान क्रांतिकारियों के बलिदान दिवस की 86वीं वर्षगांठ पर आईपीएस विनोद कुमार दोहरे ने उठाए।

मौका था बृहस्पतिवार को काकोरी शहीद स्मारक में काकोरी शहीद स्मारक विकास एवं संरक्षण समिति व शहीद स्मृति समारोह समिति के कार्यक्रम का।
एडीएम प्रशासन देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने युवाओं से आह्वान किया कि क्रांतिकारियों की शहादत हमेशा अपने दिलों में जिंदा रखें। संघर्षों से मिली आजादी की कीमत समझें।
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इस मौके पर काकोरी कांड के शहीदों पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां वारसी, राजेन्द्र नाथ लाहिणी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद की स्मृति में युवा मेले का आयोजन किया गया, जहां पीएसी-पुलिस के बैंड ने धुनों से सलामी दी।
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पहली बार शहीदों को सशस्त्र सलामी भी दी गई। वहीं, राज्य अभिलेखागार की ओर से शहीद मंदिर परिसर में अभिलेख प्रदर्शनी लगाई गई।

साथ ही स्वास्थ्य शिविर में दर्जनों ने रक्तदान किया।शहीद स्मृति समारोह समिति के महामंत्री उदय खत्री, पीएसी डिप्टी कमांडेंट प्रेमचन्द्र, सीओ श्यामाकांत त्रिपाठी आदि ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
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