कथक की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से कथक नृत्यांगनाओं ने सोमवार को पंडित लच्छू महराज को श्रद्धांजलि दी।
पं. लच्छू महराज ने संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) में कथक केंद्र की स्थापना की थी, जहां से कथक सीखकर निकले कई कलाकार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर नाम रोशन कर चुके हैं।
सोमवार को लच्छू महराज जयंती के अवसर पर इसी केंद्र के कलाकारों ने कथक के जरिये लच्छू महराज को याद किया।
इसके अलावा दिल्ली से आई नृत्यांगना शिखा खरे की प्रस्तुतियां भी खास रहीं।
संत गाडगे प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में कथक की शुरुआत नृत्यांगना शिखा खरे ने कृष्ण स्तुति ‘गोपालम् गिरिराज राजधरनम्...’ से की।
भावपूर्ण नृत्य दर्शकों को काफी पसंद आया। फिर तीन ताल में पारंपरिक कथक के जरिये लखनऊ घराने की विशेष गतें और निकास पेश की।
खासतौर पर लच्छू महराज की बंदिशों ने तालियां बटोरीं। ‘छेड़ो न नंद के सुनहू छैला...’ ठुमरी और वर्षा ऋतु पर कथक पेश कर समां बांध दिया।
अंत में उन्होंने तबले और कथक की बेहतरीन जुगलबंदी दिखाई।
तबले पर योगेश गंगानी, पखावज पर ऋषि उपाध्याय, सारंगी पर नासिर अहमद, हारमोनियम व गायन पर विजय परिहार ने संगत की।
कथक केंद्र के कलाकारों की प्रस्तुतियां रेनू व सुरेन्द्र सैकिया के निर्देशन में तैयार कथक संरचनाओं से हुई।
सरस्वती वंदना के बाद पारंपरिक कथक पेश किया गया। ‘डमरू हर कर बाजे...’ बोल पर कथक हुआ।