अच्छी कविता वह होती है जो अतीत, वर्तमान और भविष्य की यात्रा करती है। जो
है उसे व्यक्त करने के साथ ही जो हो सकता है उसे भी बताती है।
इस लिहाज से
गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की कविता ‘अंधेरे में’ मध्यम वर्ग का महाकाव्य है।
कविता के 50 वर्ष पूरे होने पर लखनऊ विवि के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित
गोष्ठी ये विचार आलोचक डॉ. मैनेजर पांडेय ने व्यक्त किए।
कवि नरेश सक्सेना
ने मुक्तिबोध के जीवन संघर्ष के साथ ही कविता में बताई गई व्यवस्था के आपसी
षड्यंत्र की चर्चा की। उनके अनुसार ‘अंधेरे में’ कविता आजादी के बाद
भारतीय मध्यम वर्ग के संघर्ष की कहानी है।
कार्यक्रम में प्रणय कृष्ण, डॉ.
धर्मेंद्र प्रताप सिंह सहित कई विद्वानों ने भाग लिया।