आचार संहिता लगने के पहले मुख्यमंत्री आवास पर एक कार्यक्रम था। पिछड़ों के कुछ नेता मंच पर, तो कुछ सामने सोफे पर विराजमान थे।
दिलचस्प वाकया ये हुआ कि जब मुख्यमंत्री सीनियर मंत्रियों के साथ परियोजनाओं के शिलान्यास व उद्घाटन के लिए बटन दबाने पहुंचे तो सोफे वाले एक युवा नेता, जिन्हें राज्यमंत्री का ओहदा हासिल है, डायस वाले कैबिनेट मंत्री को पीछे कर उनके आगे खड़े हो गए।
युवा नेता का कद लंबा होने के कारण मंत्रीजी तमाम कोशिश के बावजूद फोटोग्राफरों के कैमरे में कैद नहीं हो पाए।
दूसरे दिन अखबारों में बड़े मंत्री की फोटो गायब और नायब की छपी नजर आई। बड़े मंत्री परेशान हैं, छोटे कॉलर ऊंची किए नजर आते हैं।
नायब कहते भी हैं, दो साल में विभागीय योजनाओं को लेकर पहली दफा चमकने का मौका मिला तो साहब आगे आ गए।
ऐसे में अगर चुनाव के पहले इस बार चूक जाता तो न जाने कब मौका आता? सो मौका मिलने पर चूकना नहीं चाहिए।