प्रो. विनय पाठक
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कमीशनखोरी के आरोपों में फंसे छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक के करीबी अजय मिश्रा के दो नौकरों की कंपनियां भी टेंडर में हिस्सा लेती थीं। जांच में पता चला कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रभारी कुलपति रहने के दौरान प्रो. पाठक एजेंसी से कमीशन तय होते ही महीनों का काम मिनटों में निपटा देते थे।
एसटीएफ के हाथ कई ऐसी पत्रावलियां लगी हैं, जिसमें एक एजेंसी को काम देने के लिए सभी प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी कर वर्कआर्डर भी दे दिया गया। अधिकतर काम अजय मिश्रा की कंपनियों को दिया गया। कागजी खानापूरी के लिए अजय ने अपने दो नौकरों के नाम से खोली गई कंपनियों के पेपर लगाए और खुद की कंपनी को एल-1 श्रेणी की बताकर काम ले लिया। इसके बदले प्रो. पाठक को मोटा कमीशन दिया गया। नियमत: दो लाख से अधिक के काम टेंडर या जेम पोर्टल के जरिए दिए जाने थे, लेकिन पाठक ने एक करोड़ तक के काम अपने चहेते को बिना टेंडर ही दे दिए और बिना वित्त नियंत्रक की अनुमति के ही भुगतान कर दिया।
आगरा एसटीएफ दस्तावेज लेकर पहुंची लखनऊ
आगरा एसटीएफ की टीम प्रो. पाठक के कार्यकाल के दस्तावेज लेकर लखनऊ पहुंच गई है। सूत्रों का कहना है कि विनय पाठक ने पद का दुरुपयोग करते हुए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है। इसके अलावा पूछताछ के लिए नोटिस जारी होते ही आगरा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रहे संजीव कुमार सिंह ‘नेटवर्क से गायब’ हो गए हैं।