शहर व ग्रामीण इलाके में ज्यादातर दंत चिकित्सक मरीजों को इंप्लांट की सलाह देते हैं। यह काफी खर्चीला है। मगर केजीएमयू माइक्रोस्कोपिक डेंटिस्ट्री द्वारा उपचार करने वाला राज्य का एकमात्र अस्पताल है।
यह जानकारी केजीएमयू के कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड इंडोडॉटिक्स के विभागाध्यक्ष प्रो. एपी टिक्कू ने दी। वह मंगलवार को दंत संकाय के डिपार्टमेंट ऑफ कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड इंडोडॉन्टिक्स विभाग की ओर से आयोजित एंडो कोलोक्यूयम कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी दांत को निकाल कर इंप्लांट करने से पहले कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड इंडोडॉन्टिक्स के विशेषज्ञों की राय जरूर लें।
इस दौरान केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि दांतों के इलाज को लेकर गंभीरता दिखाने की जरूरत है। नई तकनीक से दांतों का बेहतरीन इलाज संभव है। क्योंकि कई बीमारियों की वजह दांत को लेकर बरती गई लापरवाही होती है।
उन्होंने कहा कि सुबह-शाम दांतों की सफाई करके हम पूरे शरीर को बीमरियों से बचा सकते हैं। कुलपति ने कहा कि प्रदेशभर से आए दंत चिकित्सक और केजीएमयू के छात्र कार्यशाला में बताई गई बातों को अपनाकर दंत चिकित्सा को नया आयाम देंगे।
इटली से आए डॉ. अल्फ्रेडो इयांडोलो ने माइकोस्कोपिक डेंटिस्ट्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माइक्रोस्कोपिकजांच के जरिए हम दांतों की स्थिति की वास्तविक जानकारी जुटा सकते हैं। इस दौारन आईटीआरसी के निदेशक डॉ आलोक धवन, डॉ. प्रोमिला वर्मा, डॉ. राकेश कुमार यादव, डॉ. रमेश भारती आदि मौजूद रहे।
दांत की जांच कराएं, बीमारी से बचे
कोई भी चिकित्सक इंप्लांट लगाने की सलाह दे तो पहले माइक्रोस्कोपिक डेंटिस्ट्री द्वारा उपचार कराएं। इससे दांतों की स्थिति का पता चलता है। दांत कितना खराब है और फिलिंग किया जा सकता है या नहीं, इसका भी पता चल जाता है।
आमतौर पर लोग दांतों की सफाई और इलाज को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते हैं, इससे कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। दांतों में किसी तरह की दिक्कत हो तो तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। केजीएमयू में दांतों की जांच की ज्यादातर सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- प्रो. अनिल चंद्रा, केजीएमयू