लखनऊ। राज्य ललित कला अकादमी के 65वें स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन रविवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार और बीएचयू के चित्रकला एवं दृश्यकला विभाग के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर एस. प्रणाम सिंह को अकादमी का सर्वाधिक प्रतिष्ठित अधि सदस्यता सम्मान दिया गया। उन्हें 51 हजार रुपये की राशि, स्मृति चिह्न, प्रमाणपत्र व अंगवस्त्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर 35वीं वार्षिक राज्यस्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
कैसरबाग स्थित अकादमी में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा महेंद्र प्रसाद अग्रवाल, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र, राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील विश्वकर्मा और उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र मौजूद रहे। अतिथियों ने अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी-2025 महाकुंभ, प्रयागराज व अखिल भारतीय मूर्तिकला शिविर-2026, वाराणसी के कैटलॉग का विमोचन किया।
समारोह में 35वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के 10 विजेताओं को 25-25 हजार रुपये के पुरस्कार दिए गए। पद्मश्री राम वनजी सुतार के व्यक्तित्व पर आधारित ऑनलाइन प्रतियोगिता के 14 विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।
तकनीक के बजाय, प्रकृति से सीखें युवा कलाकार : प्रो. एस. प्रणाम सिंह
फोटो सिंगल कॉलम
प्रो. एस. प्रणाम सिंह ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि आजकल के युवा कलाकारों में संभावनाएं तो बहुत हैं लेकिन तकनीक का बहुत ज्यादा प्रयोग उन्हें मौलिकता से दूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अगर अपनी कला को निखारना है और कुछ अलग करना है तो उन्हें दूसरों की नकल करनी छोड़नी होगी। इसके अलावा मोबाइल, इंटरनेट के जरिये कला को विकसित करने का युवाओं का प्रयास उनकी नैसर्गिक प्रतिभा के विकास में बाधक बन रहा है।
प्रो. प्रणाम ने कहा कि जब युवा आसपास के सामाजिक परिदृश्य और प्रकृति से सीखकर कुछ रचता है तो वह उसकी मौलिक कृति होती है। आजकल के युवाओं में धैर्य की भी कमी है जिसकी वजह से वे तकनीक के बलबूते जल्द से जल्द बहुत कुछ पा लेना चाहते हैं। अधि सदस्यता सम्मान मिलने पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान बताता है कि वाकई मैंने कुछ काम किया है। बोले- मणिपुर में मेरा जन्म हुआ और पश्चिम बंगाल से शिक्षा प्राप्त की लेकिन पिछले 40 वर्षों से वाराणसी ही मेरी कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि बीएचयू जॉइन करने के बाद ही मेरे काम को पहचान मिली। सेवानिवृत्ति के बाद भी अस्सी घाट के पास ही मैं विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहा हूं।
वार्षिक कला प्रदर्शनी में इन्हें मिला पुरस्कार
चंद्रभूषण श्रीवास्तव, श्रेयांशी सिंह, भारतभूषण शर्मा, रजनी ध्यानी, रश्मि श्रीवास्तव, पल्लवी सिंह, प्राची अग्रवाल, आरेंद्र चौधरी, संध्या यादव व संतोष कुमार।
ऑनलाइन प्रतियोगिता के विजेता
मोनू विश्वकर्मा, आंचल चौधरी, नेहा, सर्वेश पटेल, कुनाल विश्वकर्मा, अनुज मिश्रा, अभिषेक कुमार, सरिता शर्मा, श्वेत गोयल, सुरैया खातून, नीतू वर्मा, समीर वर्मा, शीतल चितलंगिया और दीपक शर्मा।
पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर एस. प्रणाम सिंह को अकादमी का सर्वाधिक प्रतिष्ठित अधि सदस्यता सम्मान दिया
पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर एस. प्रणाम सिंह को अकादमी का सर्वाधिक प्रतिष्ठित अधि सदस्यता सम्मान दिया