कैसरबाग स्थित इप्टा कार्यालय के बलराज साहनी सभागार में कव-आलोचक और जसम के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्
लखनऊ। कवि, आलोचक और जन संस्कृति मंच के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार की स्मृति में इप्टा की ओर से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कैसरबाग स्थित इप्टा कार्यालय में रविवार को किया गया। वक्ताओं ने उन्हें याद करते हुए कहा कि इस स्वार्थी दौर में राजेंद्र कुमार होना दुर्लभ है। वे सृजन, विचार और आंदोलन के व्यक्ति रहे हैं। उनमें जहां वैचारिक दृढ़ता थी, वहीं व्यावहारिक लचीलापन, शालीनता और लोकतांत्रिकता थी।
वामपंथी विचारक राकेश वेदा ने बताया कि प्रो. राजेंद्र कुमार का निधन 83 वर्ष की आयु में गत 16 जनवरी को प्रयागराज में हुआ था। वे कैंसर से ग्रस्त थे। उनकी ख्याति एक शिक्षक के साथ जाने-माने कवि और आलोचक के रूप में रही है। ऋण गुणा ऋण, हर कोशिश है एक बग़ावत, लोहा लक्कड़ आदि उनके प्रमुख कविता संग्रह हैं। वहीं आईना द्रोह उनकी लंबी कविता है जो पुस्तिका के रूप में आई। प्रतिबद्धता के बावजूद, शब्द-घड़ी में समय, यथार्थ और कथार्थ, कविता का समय, साहित्य में सृजन के आयाम और विज्ञानवादी दृष्टि आदि इनकी आलोचनात्मक कृतियां हैं। जन संस्कृति मंच की फरजाना महदी ने बताया कि इलाचंद्र जोशी पर उन्होंने साहित्य अकादमी के लिए मोनोग्राफ भी लिखा। राजेंद्र कुमार ने कहानियां भी लिखी हैं और पत्रिकाओं का संपादन भी किया। उन्होंने 1981 में अभिप्राय पत्रिका निकाली। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की पत्रिका बहुवचन का भी संपादन किया। गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान, मीरा स्मृति सम्मान और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से भी उन्हें सम्मानित किया गया। इस दौरान मौजूद प्रतुल जोशी, तस्वीर नक़वी, राकेश श्रीवास्तव, राजा सिंह, रिज़वान अली, सत्य प्रकाश, शांतम निधि, सूचित माथुर, आशीष कुमार, रोहित यादव आदि ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।