कानपुर के छत्रपति शाहूजी महराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक और एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा के मामले में एसटीएफ की टीम शुक्रवार को एकेटीयू पहुंचकर तीन कर्मचारियों से पूछताछ की। वहीं आगरा के डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि से कई रिकॉर्ड भी शुक्रवार को एसटीएफ मुख्यालय पहुंचे। इन सभी के मिलान का काम दो टीमों को दिया गया। इन सभी दस्तावेजों का मिलान अब तक के हुए बयान के आधार पर किया जा रहा है। ताकि आरोपियों व संदेह के घेरे में आये लोगों के बयान का सत्यापन हो सके।
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता डेविड ने अनियमितताओं की कई जानकारी दी थी। इस मामले में एसटीएफ तीन बार एकेटीयू में जा चुकी है। शुरू में कई दस्तावेज गायब हो गए थे। इन दस्तावेजों के बारे में ही पता करने के लिए एसटीएफ शुक्रवार को चौथी बार एकेटीयू पहुंची थी।
एसटीएफ ने वहां तीनों कर्मचारियों से पूछताछ की। इसमें पता चला कि कुछ दस्तावेज दूसरे विभागों में रखे हुए हैं। एसटीएफ ने एकेटीयू के अधिकारियों की मौजूदगी में इन दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया। ये दस्तावेज यहां वर्ष 2015 से वर्ष 2021 से बीच हुई नियुक्तियों और निर्माण कार्य से जुड़े हैं।
गौरतलब है कि प्री व पोस्ट परीक्षा कराने वाली वाली कंपनी के एमडी डेविड मारियो ने छत्रपति शाहू जी महाराज विवि के कुलपति विनय पाठक और एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा के खिलाफ कमीशन लेने और रंगदारी वसूलने का मुकदमा इंदिरा नगर थाने में दर्ज कराया था। मामले में एसटीएफ ने ई-वे बिल के जरिए कमीशन मैनेज करने के आरोपी अजय जैन को भी गिरफ्तार किया था।
इससे पहले अजय मिश्रा पकड़े गए थे। इन दोनों के बयान से एसटीएफ को कई जानकारियां मिली थीं। इस मामले में एसटीएफ ने अभी एकेटीयू के करीब 15 कर्मचारियों व अधिकारियों की सूची बना रखी है। इनसे पूछताछ की जाएगी। ये सभी कर्मचारी व अधिकारी प्रो. पाठक के करीबी माने जा रहे हैं। प्रो. पाठक ने इन सभी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं। हालांकि सूत्रों की मानें तो यह सभी पद के अनुसार योग्य नहीं थे।