पावर आफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर से मिलकर पूर्वांचल व दक्षिणांचल को पीपीपी मॉडल के तहत निजीकरण की दिशा में ले जाने के मामले में ज्ञापन सौंपा। बताया कि इससे करीब 16 हजार आरक्षित पद समाप्त हो जाएंगे। पदाधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री से आरक्षण बचाने की अपील की। इस दौरान एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अनिल कुमार, आरपी केन, बिंद्रा प्रसाद, सुशील कुमार वर्मा, आनंद कनौजिया, विनय कुमार आदि मौजूद रहे।
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गोपाल वल्लभ पटेल ने जारी बयान में बताया कि निजीकरण के विरोध में संगठन की ओर से प्रदेश स्तर पर जनसंपर्क महाअभियान चलाया जा रहा है। सोमवार को विभिन्न जिलों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों को पत्र सौंपे गए और निजीकरण पर विरोध जताने की मांग की गई।
टेंडर खुलने से पहले दे दिया था टरबाइन मशीन का आर्डर
उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल, उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग
उपभोक्ता परिषद ने मिर्जापुर में लग रही 1600 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। यह भी बताया कि संबंधित कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया खुलने से पहले ही टरबाइन मशीन का आर्डर दे दिया था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी को पहले से पता था कि टेंडर उसके ही हाथ में आने वाला है।
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि मिर्जापुर में 800-800 मेगावाट की दो थर्मल पावर प्लांट का टेंडर 10 अक्तूबर 2024 में खुला। लेकिन टेंडर हासिल करने वाली कंपनी ने जून 2024 में ही भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) को करीब 7000 करोड़ के दोनों टरबाइन और प्लांट उपकरण का आर्डर दे दिया था। परिषद अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए। यह पावर हाउस लगभग चार साल में बनकर तैयार होगा। इसकी दर करीब छह रुपये प्रति यूनिट जाएगी, जबकि पावर एक्सचेंज पर प्रदेश के चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है।