बैठक में विधेयक के कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। वक्ताओं ने कहा कि संशोधन विधेयक में धारा 61(जी) में संशोधन प्रस्तावित है जिससे अगले पांच वर्षों में क्रॉस-सब्सिडी खत्म कर दी जाएगी। साथ ही, विधेयक में प्रावधान है कि बिजली टैरिफ लागत-प्रतिबिंबी होना चाहिए। यानी किसी भी उपभोक्ता को लागत से कम कीमत पर बिजली आपूर्ति नहीं की जानी चाहिए। इसका मतलब है कि किसानों को 6.5 हॉर्सपावर पंप के लिए यदि वह प्रतिदिन छह घंटे चलता है तो उसे कम से कम 12000 रुपये प्रति माह बिजली बिल देना होगा। गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरें कम से कम 10-12 रुपये प्रति यूनिट हो जाएंगी। वर्चुअल पावर मार्केट और मार्केट आधारित ट्रेडिंग सिस्टम पर भी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने कहा, बिजली संविधान के मुताबिक बिजली मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के समान अधिकार हैं। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार बिजली मामलों में राज्यों के अधिकार छीन रही है। यह संघीय ढांचे और संविधान की भावना के खिलाफ है।