सीबीएसई और सीआईएससीई से संबद्ध निजी स्कूलों के शिक्षक भी प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में प्रिंसिपल बन सकेंगे।
955 पदों के लिए इसी महीने शुरू होने जा रहे इंटरव्यू के लिए इनके आवेदनों को माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड ने स्वीकार किया है।
इनके अलावा केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों ने भी यूपी के इंटर कॉलेजों में प्रधानाध्यापक के लिए आवेदन किए हैं।
पढ़ें-उर्दू शिक्षक बनने का दूसरा मौका
हालांकि यूपी बोर्ड या अन्य राज्यों के बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों के शिक्षकों के आवेदन खारिज हो गए।
जो आवेदन आए हैं उनमें लगभग 40 फीसदी तक सीबीएसई व सीआईएससीई स्कूलों के हैं।
प्रिंसिपल के इन पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2011 में विज्ञापन जारी किया गया था। उस समय बड़ी संख्या में अलग-अलग बोर्ड के अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
तब माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड में सदस्यों की संख्या पूरी न होने और अन्य कई विवादों के बाद कोर्ट ने नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी।
अब कोर्ट के ही आदेश पर उन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है। कुछ दिनों पहले सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के मुद्दे पर ही चयन बोर्ड की मीटिंग हुई थी।
उसमें तय किया गया था कि इन स्कूलों का अनुभव मान्य होगा लेकिन वह सक्षम अधिकारी से प्रमाणित होना चाहिए।
इसमें संबंधित बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक या उस स्तर के अधिकारी और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को सक्षम अधिकारी माना गया है।
इन बोर्डों के निजी स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षकों का अनुभव भी मान्य होगा।
इसमें कोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि पहले भी इस तरह का प्रावधान किया गया था लेकिन तब नियुक्तियां नहीं हो पाई थीं।
प्रिंसिपल के लिए यह योग्यता
प्रधानाचार्य पद के लिए एमए, बीएड और चार साल का पढ़ाने का अनुभव जरूरी है। यह अनुभव किसी भी राजकीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों अथवा सीबीएसई एवं आईसीएसई बोर्ड के स्कूल का होना चाहिए।
ऐसे तैयार होगी मेरिट
हाईस्कूल, इंटर, स्नातक, परास्नातक के अंकों और अनुभव के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी।
इसके अलावा एमएड, पीएचडी और अन्य शोध कार्य के लिए अतिरिक्त अंक मिलेंगे। इसके बाद अंतिम चयन साक्षात्कार के अंकों पर निर्भर करेगा।
पिछड़ सकते हैं एडेड और राजकीय शिक्षक
सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के आवेदकों की संख्या भले ही 40 फीसदी है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को चयन में पछाड़ देंगे।
इसकी वजह है कि सीबीएसई और सीआईएससीई में पढ़ा रहे शिक्षक पहले से ऊंची मेरिट वाले रखे जाते हैं।
लखनऊ की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें यहां