लखनऊ। दुबग्गा स्थित तुलसी हॉस्पिटल में आंत के ऑपरेशन के बाद हुए संक्रमण से सोमवार देर रात मरीज की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मरीज को जबरन डिस्चार्ज कर पेपर पर साइन करवा लिए थे। वहीं, सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
उन्नाव के औरास स्थित मवई गांव के रहने वाले विनाेद कुमार की मई में तबीयत बिगड़ गई थी। इस पर परिजन उन्हें नजदीकी कुंदन हॉस्पिटल रहीमाबाद ले गए थे। वहां से डॉ. सत्य प्रकाश ने दुबग्गा स्थित तुलसी हॉस्पिटल भेज दिया था, जहां अस्पताल प्रबंधक ने आंत के ऑपरेशन करने के बदले में साढ़े तीन लाख रुपये वसूल लिए थे। ऑपरेशन के बाद संक्रमण होने से मरीज के टांके सूज गए थे। ऐसे में दोबारा ऑपरेशन किया गया, मगर सूजन खत्म नहीं हुई।
सोमवार को भाई राजेंद्र ने पूरे मामले की शिकायत सीएमओ से की थी। इससे नाराज अस्पताल प्रशासन ने विनोद को जबरन डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों के पास इलाज के लिए और रुपये न होने पर वह घर लेकर चले गए। घर पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद विनोद की मौत हो गई। भाई ने अस्पताल प्रशासन पर गलत ऑपरेशन व वसूली का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
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Iमरीज के आंत की दोबारा सर्जरी की गई थी। वह चार दिन भर्ती रहा था। उसे डिस्चार्ज किया गया था। इसके बाद तीमारदार मरीज को लेकर घर चले गए थे। लापरवाही का आरोप गलत है।I
I- गुरुवेंद्र यादव, संचालक, तुलसी हॉस्पिटलI