लखनऊ। निजी अस्पतालों में मरीजों को चार से छह हजार रुपये प्रति यूनिट प्लेटलेट्स दिलवाए जा रहे हैं। डोनर न मिलने पर तीमारदार मजबूरी में यह कीमत चुकाने को विवश हैं। हैरानी की बात यह है कि प्लेटलेट्स किस ब्लड बैंक से मंगाए गए, अस्पताल इसका रिकॉर्ड भी परिजनों को नहीं दे रहे। निजी अस्पताल और ब्लड बैंकों की यह सांठगांठ खुलेआम चल रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं।
रायबरेली के बछरावा निवासी जगदीश (75) को सांस लेने में दिक्कत थी। उनकी प्लेटलेट्स 22 हजार रह गई थी। नजदीकी अस्पताल में राहत न मिलने पर परिजनों ने उन्हें 17 नवंबर की शाम मोहनलालगंज स्थित शिवा हॉस्पिटल में भर्ती किया। यहां मरीज को दो यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई गई। दामाद राजेश के अनुसार, अस्पताल के माध्यम से 6-6 हजार रुपये प्रति यूनिट में प्लेटलेट्स दिलाई गई थी। प्लेटलेट्स चढ़ाने के नाम पर ढाई हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए। छह दिन की भर्ती के दौरान अस्पताल ने एक लाख रुपये से अधिक का बिल थमा दिया और हालत में सुधार न होने पर 23 नवंबर को मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। राजेश ने मामले की शिकायत सीएमओ और एफएसडीए से करने की बात कही है।
पीजीआई से ट्रॉमा, फिर बलरामपुर, परिजन भटकते रहे
शिवा हॉस्पिटल से रेफर होने के बाद परिजन मरीज को लेकर पीजीआई पहुंचे। सोमवार सुबह 10 से शाम 4 बजे तक इमरजेंसी में भर्ती के लिए चक्कर लगाए, मगर डॉक्टरों ने बेड खाली नहीं लिखकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। पूरी रात ट्रॉमा में गुजारने के बाद मंगलवार सुबह मरीज को बलरामपुर अस्पताल भेजा गया। वहीं मरीज का इमरजेंसी में इलाज जारी है।
Iतीमारदार प्लेटलेट्स खुद निजी ब्लड बैंक से लाए थे। अस्पताल ने नहीं भेजा था। आरोप बेबुनियाद हैं।I
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- दीपक शुक्ला, मैनेजर, शिवा हॉस्पिटलI
Iनिजी ब्लड बैंक बिना डोनर महंगी दर पर खून बेच रहे हैं तो कार्रवाई होगी। मामले की जांच कराई जा रही है।I
I- ब्रजेश, सहायक मंडल आयुक्त, एफएसडीएI