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सूरत-ए-हालः 1990 जैसा खींचा जा रहा है धर्मसभा की तैयारियों का खाका, प्रशासन सतर्क

Thu, 22 Nov 2018 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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धर्मसभा की तैयारियां - फोटो : amar ujala
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धर्मसभा की तारीख निकट आने के साथ ही संघ परिवार ने भीड़ को अयोध्या पहुंचाने की रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसका खाका 1990 की तर्ज पर खींचा जा रहा है। वाहन रैलियों, प्रभात फेरियों और घर-घर संपर्क के साथ 25 नवंबर को अयोध्या जाने वालों का पूरा ब्योरा तैयार कर उन्हें टोलियों में बांटा जा रहा है। 

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अयोध्या और आसपास के 200 किलोमीटर क्षेत्र को लगभग 1000 प्रखंडों में बांटकर विहिप व संघ के स्थानीय कार्यकर्ताओं को अयोध्या जाने वालों की प्रखंडवार सूची बनाने और साधनों का ब्योरा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

सभा में आने वालों के लिए भोजन व जलपान की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। अराजक तत्वों के प्रवेश की आशंका दूर करने के लिए संघ व विहिप ने पुलिस के साथ अपने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को भी लगाने की रणनीति बनाई है।
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संघ परिवार की कोशिश धर्मसभा के जरिये यह संदेश देने की दिख रही है कि हिंदू समाज का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वह राममंदिर पर अब ज्यादा प्रतीक्षा नहीं कर सकता। अगर इस मामले को लंबे समय तक लटकाया जाता है तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। जैसा कि इस मामले में न्यायालय में पक्षकार सखा रामलला विराजमान त्रिलोकीनाथ पांडेय कहते भी हैं कि 29 अक्तूबर को सर्वोच्च न्यायालय का रुख हिंदू समाज को अपमानित करने वाला रहा। 

धर्मसभा बता देगी कि वे दिन लद गए जब हिंदू समाज अपना उत्पीड़न और अपमान चुपचाप बर्दाश्त कर लेता था। याद रहे कि 1990 में संघ ने तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार के कड़े विरोध और मंदिर समर्थकों की धरपकड़ के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को अयोध्या पहुंचा दिया था।
 

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लड़ाई 80 बनाम 20 करने का प्रयास  

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार वैसी स्थिति नहीं है। प्रदेश और देश में संघ परिवार का ही सदस्य भाजपा सरकार में है फिर भी संघ तैयारियों में कसर नहीं छोड़ना चाहता जिससे कि मंदिर पर माहौल बन जाए। साथ ही लोगों को संदेश भी मिल जाए कि सरकार में होने का मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहना नहीं है। 

हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने पर विरोधी ताकतें फिर प्रभावी हो जाएंगी। विश्लेषकों की मानें तो 1990 जैसी तैयारियों के पीछे राजनीतिक वजह भी है। संघ परिवार को पता है कि चुनावी लड़ाई को हिंदू बनाम अन्य बनाए बिना भाजपा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाएगा। 

सपा और बसपा जैसे दल हिंदुओं के वोटों में जातीय समीकरणों से बंटवारा कर लेंगे। इसीलिए वे मंदिर पर माहौल बनाकर हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने की कोशिश कर रहा है ताकि लड़ाई 80 बनाम 20 हो जाए। वैसे विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि छोटे-छोटे हिस्सों में तैयारियां हमारी काम करने की शैली का हिस्सा है। 

पर, सूत्रों की मानें तो संघ परिवार विरोधियों की साजिशों की आशंका के मद्देनजर पूरी सावधानी बरत रहा है ताकि रैली में आने वाले एक-एक व्यक्ति की पहचान उसके पास रहे।

 
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इस तरह की जा रहीं तैयारियां 

धर्मसभा में मुख्य रूप से मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को ही बुलाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। संघ परिवार की सांगठनिक रचना के अनुसार इसमें अवध, गोरक्ष, काशी और कानपुर-बुंदेलखंड नाम से चार प्रांत हैं। मुख्य रूप से इन्हीं प्रांतों के जिलों से लोगों को अयोध्या में जुटाने की तैयारी है। पश्चिमी यूपी के लोगों को 9 दिसंबर को दिल्ली में हो रही धर्मसभा में जुटाने का फैसला किया गया है।  

रखेंगे एक-एक पर नजर

अयोध्या व आसपास के क्षेत्रों को लगभग एक हजार भागों (प्रखंडों) में बांटा गया है। विहिप के प्रखंड अध्यक्ष, प्रखंड मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड कार्यवाह को संबंधित स्थानों से जाने वालों को टोलियों में बांटकर उनकी सूची बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। विहिप के विभाग मंत्री देवेंद्र मिश्र बताते हैं कि अकेले लखनऊ से ही लगभग 150 बसें श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या जाएंगी। सूची बनाई जा रही है लेकिन अनुमान है कि अलग-अलग जगह से 2000 बसें 24 नवंबर की शाम से 25 की सुबह तक अयोध्या पहुंचेंगी। बड़ी संख्या में लोग निजी साधनों से भी पहुंचेंगे। 

खबर है कि पुलिस और प्रशासन से जुड़े आला अधिकारी 24 और 25 तारीख के कार्यक्रमों को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हालात का जायजा ले रहे हैं।  खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। 
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