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Lucknow News: समय से पूर्व जन्मी 480 ग्राम की नवजात को 84 दिन के उपचार से मिला नया जीवन

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अपनी टीम के साथ डॉ. आशुतोष वर्मा।  - फोटो : संवाद
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लखनऊ। निजी अस्पताल ने समय से पूर्व प्रसव (प्रीमैच्योर) वाले नवजात शिशु की चिकित्सा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने 26 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मी मात्र 480 ग्राम वजन की बच्ची को 84 दिनों के उपचार के बाद नया जीवन दिया है।
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वरिष्ठ नवजात एवं शिशु रोग विशेषज्ञ और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आशुतोष वर्मा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने यह सफलता हासिल की। जन्म के समय बच्ची की स्थिति बेहद गंभीर थी। उसे तत्काल नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती किया गया। इस दौरान बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। शुक्रवार को प्रेसवार्ता में डॉ. आशुतोष वर्मा ने बताया कि यह सफलता पूरी एनआईसीयू टीम की अथक मेहनत, समर्पण और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का परिणाम है। वर्तमान में बच्ची का वजन 770 ग्राम हो चुका है। वह ऑक्सीजन पर पूरी तरह स्थिर है। बच्ची प्रत्येक तीन घंटे में 15 मिलीलीटर दूध पी रही है।

दुर्लभ उपलब्धि
डॉ. आशुतोष ने दावा किया कि प्रदेश में इतने कम वजन के किसी प्रीमैच्योर बच्चे की जान बचने का यह अब तक का नया रिकॉर्ड है। इसने 685 ग्राम के बच्चे के पूर्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यंत दुर्लभ है।
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समय से पूर्व प्रसव से ऐसे बचें
- गर्भावस्था के दौरान महिलाएं मानसिक या शारीरिक तनाव से बचें।
- ज्यादा तनाव से समय से पहले प्रसव होने का खतरा बढ़ जाता है।
- लगातार कई घंटों तक खड़े रहने या भारी सामान उठाने से बचें।
- पेशाब की नली में किसी भी तरह के संक्रमण को नजरअंदाज नहीं करें।
- दो बच्चों के बीच तीन वर्ष से अधिक का अंतर जरूर रखें।
- 35 वर्ष की उम्र से पहले गर्भधारण करने से खतरा कम रहता है।
- गुप्त अंगों के संक्रमणों को बढ़ने नहीं दें। तुरंत इलाज कराएं।
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