लखनऊ। शादी के बाद लंबे समय तक गर्भधारण न होना या फिर गर्भ ठहरने के बाद बार-बार गर्भपात हो जाना। इन समस्याओं से संजय गांधी पीजीआई के प्रीकॉन्सेप्शन क्लीनिक में आने वाली महिलाओं को निजात मिल रही है। यहां आने वाली महिलाओं में से 20 फीसदी में कोई न कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या मिली। इलाज के बाद इनमें से 78 फीसदी महिलाओं ने गर्भधारण किया।
मैटेरनल एंड रीप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग की प्रोफेसर व क्लीनिक की संचालक डॉ. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2012 में ही प्रीकॉन्सेप्शन क्लीनिक स्थापित करने की गाइडलाइन के बाद यह क्लीनिक शुरू किया गया। जनवरी 2021 से दिसंबर 2023 के बीच क्लीनिक में कुल 920 महिलाएं आईं। इनमें से 20.5 फीसदी यानी 188 में स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याएं मिलीं। इलाज के बाद 78.1 फीसदी यानी 147 ने गर्भधारण किया।
महिलाओं को सबसे ज्यादा थायराइड की समस्या
तीन साल की अवधि में महिलाओं में सबसे ज्यादा समस्या थायराइड ग्रंथि की मिली। इसके बढ़ने व कमी में मां बनने में समस्या होती है। करीब एक चौथाई महिलाओं में यह समस्या थी। इसके अलावा डायबिटीज, बीपी, कुछ सिंड्रोम समेत कई अन्य ऐसी बीमारियां थीं, जिनके बारे में महिलाओं को क्लीनिक आकर पता चला।
हर बुधवार को होता है संचालन
प्रो. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि क्लीनिक का संचालन हर बुधवार होता है। पहले दो सप्ताह में इसका संचालन एक बार होता था। हर ओपीडी में करीब 40 महिलाएं पहुंच रहीं हैं।
परिवार में कोई हो आनुवांशिक रोग से ग्रस्त तो जरूर आएं क्लीनिक
प्रो. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि किसी के परिवार में आनुवांशिक रोग से ग्रसित कोई व्यक्ति है तो उसे इस क्लीनिक पर जरूर आना चाहिए। यह क्लीनिक विवाहितों के साथ ही अविवाहित युवतियों को भी परामर्श देता है। इसका मकसद स्वस्थ बच्चे को जन्म दिलाना है।
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