केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निर्देश पर वाराणसी और प्रयागराज को ‘मॉडल’ नगर निगम के रूप में विकसित किया जाएगा। शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत केंद्र सरकार ने इन शहरों का चयन किया है।
दोनों नगर निगम क्षेत्रों का विकास केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार किया जाएगा। इसमें पथ विक्रेताओं की सुविधा का खास ख्याल रखते हुए विकास कार्य कराए जाएंगे।
दरअसल, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने एनयूएलएम से संचालित ‘शहरी पथ विक्रेताओं की सहायता योजना’ के तहत सभी राज्यों में दो नगर निगमों को मॉडल के तौर पर विकसित करने का फैसला किया है।
इसी कड़ी में यूपी से प्रयागराज और वाराणसी नगर निगमों का चयन किया गया है। योजना के तहत इन दोनों शहरों में चिह्नित वेंडिंग जोन में अवस्थापना विकास के लिए विस्तृत क्रियान्वयन प्लान (डीआईपी) तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।
इन दोनों शहरों में प्रस्तावित विकास कार्यों पर होने वाले खर्च का 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी धन राज्य सरकार देगी। दोनों शहरों का विकास होने के बाद स्थानीय स्तर पर 27 अन्य नगर निकायों में भी वेंडिंग जोन को मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके बाद लखनऊ समेत 28 अन्य शहरों के लिए भी डीआईपी तैयार कराने का फैसला किया गया है।
मॉडल शहरों में होंगे ये काम
90 वार्ड वाले वाराणसी में 24472 वेंडरों के अलावा 25 वेंडिंग जोन, 22 नॉन वेंडिंग जोन और 80 वार्ड वाले प्रयागराज में 13809 वेंडर, 25 वेंडिंग जोन और 10 नॉन वेंडिंग जोन चिह्नित किए गए हैं।
इन्हें मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा। वेंडिंग जोन में पथ विक्रेताओं को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। पक्का फर्श, कूड़ा प्रबंधन, शौचालय, पेयजल और पार्किंग समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इन 27 नगर निकायों के वेंडिंग जोन का भी होगा विकास
कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद, झांसी, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, मुजफ्फरनगर, मऊ, लोनी, बुलंदशहर, हापुड़, उन्नाव, मिर्जापुर, हरदोई, फतेहपुर, उरई, अमरोहा, शाहजहांपुर, जौनपुर व संभल।