मृतक विजय व गिरफ्तार किए गए चार आरोपी।
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राजन सोनकर ने अपने तीन साथियों संग वारदात की पटकथा तैयार की। साजिश के तहत देवा शरीफ जाने की बात कहते हुए सात जनवरी को विजय को फोन कर प्रतापगढ़ से बुलाया गया। इसके बाद कार किराये पर ली गई। कार लेने के बाद विजय को दोबारा फोन कर भांजी के घर से हाईवे के पास बुलाया गया। इसके रात करीब दस बजे सभी कार से निकले। कार में एक व्यक्ति को और साथ ले चलने की बात कहते हुए कार मोहनगंज मार्ग के बजाए रायबरेली की तरफ ले गए।
मोजमगंज नाले की दाहिनी पटरी पर कार से कुछ दूर चलने के बाद कार कच्चे मार्ग पर रोक दी गई। विजय सिंह को नीचे उतारा उसके साथ पैदल कुछ दूर जाने पर राजन से पीछे से गड़ासे से वार किया। वार से विजय बेहोश हो गया। इसके चारों उन्हें घसीट कर नाले के पास ले। जहां अजय सोनकर और प्रदीप ने विजय का पैर पकड़ा और सौरभ ने हाथ पकड़ कर सिर दबाया। इसके बाद राजन ने गर्दन पर वार कर सिर को धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद चारों ने घसीट कर धड़ को नाले में फेका। मृतक की पहचान छुपाने के लिए धड़ को नाले में फेंक दिया जबकि सिर को एक बोरी में ईटों के साथ भरकर अपने घर के पास गदहिया तालाब के पास स्थित पुराने कुएं में डाल दिया।