‘काहे के बड़े हैं अगर दही में पड़े हैं...’। एक पंक्ति में हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाले दिवंगत हास्य कवि प्रदीप चौबे ने नगर के मंचों से भी शहरवासियों को खूब ठहाके लगवाए थे। शुक्रवार सुबह जब राजधानी के साहित्यप्रेमियों को उनके निधन की जानकारी हुई तो एक बारगी लोगों के जेहन में चौक में हुए हास्य कवि सम्मेलन चकल्लस और रवीन्द्रालय में अट्टहास के मंच पर ठहाके लगवाने वाले प्रदीप चौबे की यादें ताजा हो गईं। वे नगर के हास्य मंचों का कई बार आकर्षण बने। मार्च 2012 में होली केबाद चौक मे होने वाले चकल्लस कवि सम्मेलन केमंच पर दिखे तो मई 2013 में रवीन्द्रालय में अटट्हास की ओर से आयोजित एक सम्मान समारोह में भी उनकी मौजूदगी से चार चांद लग गए।
नगर के हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने भावुक मन से बताया कि वे वर्ष 2017 में गोमतीनगर में आयोजित विपुलम सम्मान में भी शहरवासियों से अपनी रचनाओं के साथ रूबरू हुए थे। उन्होंने बताया कि चौबे जी हमारे काव्य मंचों पर लॉफिंग गैस सिलिंडर के नाम से जाने जाते थे। उनकी कद-काठी के हिसाब से उनको साथी कवि गजबदन भी कहा करते थे। हम सबको एक साथ चुपके से बिना बताए हमेशा के लिए छोड़ कर चले गये। एक कवि यही कह सकता है कि वे अब स्वर्ग में भी सबको ठहाके लगवाएंगे। खबर सुनने केबाद से भावुक सर्वेश अस्थाना ने बताया कि करीब पांच-छह साल पहले हम और प्रदीप चौबे जी एक साथ लगभग छह हफ्ते की अमेरिका यात्रा पर गए थे। वे मंच पर ही हास्य सुनाते थे, बाकी वो शानदार गज़लकार भी थे। नगर के हास्य कवि मुकुल महान और हास्य पत्रिका अट्टहास के वरिष्ठ पत्रकार संपादक अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि हमने अपना अच्छा दोस्त खो दिया। उनके निधन पर नगर के कवियों राजेन्द्र पंडित, ज्योतिशेखर, विनोद मिश्र, अभय निर्भीक, वत्सला पांडेय, संतोष सिंह, सुभाष रसिया, चंद्रेश शुक्ल, सौरभ श्रीवास्तव, निशा सिंह, शिखा श्रीवास्तव और पंकज प्रसून समेत तमाम ने दुख जताया है।